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जजों के हैं छुपे हुए दुश्मन, आधारहीन शिकायतों पर नहीं होनी चाहिए कार्रवाई

Sun, 29 Jul 2018 12:11 PM IST
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 29 Jul 2018 12:11 PM IST
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High Court has ordered the Additional Sessions Judge to take the services again
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी व जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की फुल बेंच के आदेश को खारिज करते हुए एडिशनल सेशन जज को दोबारा सेवाओं में लेने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जो आधार प्री मेच्योर रिटायरमेंट के लिए बनाए गए थे वे काफी नहीं। ईमानदार जजों के छुपे द्रुश्मन होते हैं और बड़ी संख्या में उनके खिलाफ झूठी शिकायतें सौंपी जाती हैं। ऐसे में यह हाईकोर्ट का फर्ज है कि वह अपने अधीन काम करने वाले ईमानदार जजों की रक्षा करे।
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मामला पंजाब में तैनात एडिशनल सेशन जज रविंदर सिंह को प्री मेच्योर रिटायरमेंट देने से जुड़ा है। रविंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट की फुल कोर्ट के प्रशासनिक फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को यह केस सुनने को कहा था। याची ने कोर्ट को बताया कि 2007-08 व 2008-09 की उसकी एसीआर को सी ग्रेड दिया गया जो सामान्य से नीचे था।
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इसके साथ ही उसके खिलाफ एक शिकायत सौंपी गई थी जो आधार विहीन थी। कोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए एसीआर की समीक्षा कर कहा कि कैसे किसी जज के खिलाफ लोगों के बीच क्या बात होती है इससे उसकी ख्याति पर टिप्पणी की जा सकती है? जज जिसके खिलाफ आदेश जारी करते हैं वह उनके लिए बुरा हो जाता है। यदि जज की ख्याति को लेकर कोई शिकायत होती है तो उसे उस जज के सामने रख उसका पक्ष लिया जाना जरूरी है।
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इसके बाद ही एसीआर में एडवर्स टिप्पणी की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केवल मौखिक आधार पर होने वाली बातों को आधार बनाकर एसीआर में टिप्पणी की गई जो गलत है और ऐसे में कोर्ट ने दोनों एसीआर को सी से बी प्लस करने के आदेश दिए हैं।


6 साल की लड़ाई के बाद इंसाफ
एडिशनल जज रविंदर सिंह को 28 फरवरी 2012 को हाईकोर्ट की फुल बेंच ने प्री मेच्योर रिटायर करने की सिफारिश पंजाब सरकार से की थी। 28 मार्च 2012 को पंजाब के गवर्नर ने उन्हें प्री मेच्योर रिटायरमेंट दे दी। इसके खिलाफ केस रविंदर सिंह ने 6 साल लड़ा और अब हाईकोर्ट ने उनको सेवा में बहाल करने के तथा वरिष्ठता व अन्य सभी लाभ जारी करने के आदेश दिए हैं।
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