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रंजीत सिंह आयोग पर टिप्पणी मामले में मजीठिया और सुखबीर बादल हुए हाईकोर्ट में पेश

Thu, 11 Jul 2019 08:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 11 Jul 2019 08:35 PM IST
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High Court grants bail to Sukhbir Badal and Majithia in case filed by Justice Ranjit Singh
बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और सुखबीर बादल - फोटो : अमर उजाला

रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह व उनके आयोग पर टिप्पणी के मामले में गुरुवार को सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया हाईकोर्ट में पेश हुए। हाईकोर्ट ने दोनों को एक-एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए 21 अगस्त से इस शिकायत की मान्यता को लेकर बहस के आदेश दिए हैं।

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गुरुवार को जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो जस्टिस अमित रावल ने सुखबीर बादल के वकील सीनियर एडवोकेट अशोक अग्रवाल से पूछा कि क्या आपने वो वीडियो देखा हैं जिसमे दोनों ने जस्टिस रंजीत सिंह और आयोग पर असम्मानजनक टिपण्णियां की गई हैं..? 
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इस पर अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने नहीं देखा। इस पर जस्टिस रावल बोले कि अगर आपने यह वीडियो देखा होता तो आप इस तरह बचाव नहीं करते। जस्टिस रावल ने कड़े लहजे में कहा कि हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज पर इस तरह की टिपण्णियां कैसे की जा सकती हैं। न्यायपालिका पर इस तरह की अशोभनीय टिपण्णियां करने से बचा जा सकता था।

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जस्टिस रावल ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कुछ भी बोल दिया जाए। राजनेता अक्सर भावनाओं में बह कर इस तरह की टिपण्णियां कर देते हैं। सुखबीर बादल और मजीठिया की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अशोक अग्रवाल और आरएस चीमा ने इस याचिका की मान्यता पर सवाल उठाए। 

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वह मामले को लेकर अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की दलीलें सुनेंगे। लिहाजा हाईकोर्ट ने सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया दोनों को एक-एक लाख के निजी बॉन्ड भर जमानत देते हुए उन्हें मामले की अगली सुनवाई पर पेश होने के आदेश दे दिए हैं।

क्या है मामला
जस्टिस रंजीत सिंह ने हाईकोर्ट को शिकायत देते हुए सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ने उन पर और उनकी लॉ की डिग्री पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की है।

इसके अलावा आयोग और उनके खिलाफ विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर दिए गए इंटरव्यू का भी हवाला दिया था। जस्टिस रंजीत सिंह ने कहा था कि यह सीधे तौर पर कमीशंस ऑफ इन्क्वाइरी एक्ट की धारा-10 ए का उल्लंघन है। 

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