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Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court gives permission for abortion to sixth class girl who was a victim of misdeed

HC Order: 'जीवन केवल सांस लेना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीना', छठी कक्षा की मासूम को गर्भपात की अनुमति

Thu, 28 Mar 2024 06:22 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 28 Mar 2024 06:22 AM IST
सार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के 21 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने का आदेश जारी किया है। पीड़िता की ओर से याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट रितु पुंज ने हाईकोर्ट को बताया कि वह दुष्कर्म का शिकार हुई थी और अभी वह 13 साल की है और छठी कक्षा में पढ़ रही है।

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High Court gives permission for abortion to sixth class girl who was a victim of misdeed
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जीवन केवल सांस लेना नहीं, बल्कि यह सम्मान के साथ जीना है और यदि पीड़िता को गर्भपात की अनुमति नहीं दी गई तो उससे यह अधिकार छिन जाएगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के 21 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने का आदेश जारी करते हुए यह टिप्पणी की है।

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पीड़िता की ओर से याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट रितु पुंज ने हाईकोर्ट को बताया कि वह दुष्कर्म का शिकार हुई थी और अभी वह 13 साल की है और छठी कक्षा में पढ़ रही है। लुधियाना में इस मामले में दो लोगों के खिलाफ पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज हुआ था। याची ने बताया कि वह अभी पूरी तरह से अपने परिजनों पर निर्भर है और ऐसे में वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) अधिनियम के अनुसार, दो पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा 20 सप्ताह तक गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जा सकती है। 20 सप्ताह से 24 सप्ताह के बीच केवल कुछ मामलों में गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी जा सकती है।
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जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय कठिन होता है। इस मामले में पीड़िता दुष्कर्म की शिकार है और यदि वह बच्चे को जन्म देगी तो उसका परिवार व समाज दोनों उसे अस्वीकृत कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह बच्ची की पीड़ा को बढ़ाएगा और उसके साथ अन्याय होगा। याचिकाकर्ता जिस पीड़ा से वह गुजर रही है उसे देखते हुए और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देना ही सही निर्णय है।
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यातनापूर्ण हो जाएगा जीवन
जस्टिस कुमार ने कहा कि पीड़िता अभी नाबालिग है और उसे अभी अपनी शिक्षा पूरी कर जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करने हैं। इसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि गर्भावस्था नाबालिग से दुष्कर्म का परिणाम है। यदि बच्चा पैदा हुआ तो वह अच्छी यादों को नहीं जोड़ेगा बल्कि उस आघात और पीड़ा की याद दिलाता रहेगा जिससे उसे गुजरना पड़ा। साथ ही अनचाहे बच्चे के रूप में पैदा होने की स्थिति में बच्चे को या तो छोड़ दिया जाएगा या तो उसका पूरा जीवन तानों से भरा यातनापूर्ण होगा। किसी भी स्थिति में मां और बच्चे को जीवन भर सामाजिक कलंक से भुगतना पड़ेगा जो दोनों के हित में नहीं है। हाईकोर्ट ने पीजीआई चंडीगढ़ को याची की गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन करने का आदेश दिया।

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