{"_id":"5fc7999e8ebc3e9c02168fc8","slug":"high-court-directive-ineffective-students-future-in-darkness-chandigarh-news-pkl39582650","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का निर्देश बेअसर, छात्रों का भविष्य अधर में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का निर्देश बेअसर, छात्रों का भविष्य अधर में
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री के विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। हाईकोर्ट ने पीयू से कहा था कि विद्यार्थियों के हितों की ओर ध्यान दें लेकिन पीयू ने इस पर काम ही नहीं किया। इससे छात्रों में आक्रोश है। अब वह फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं ताकि उनका भविष्य बच सके।
पीयू के यूआईसीईटी विभाग से एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री कोर्स संचालित है। कई वर्षों से इसकी पढ़ाई हो रही है। कई बैच पास हो चुके हैं। पास होने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा संकट रोजगार का आ रहा है। कॉलेज व विश्वविद्यालयों में वह शिक्षक बनकर अपना सपना पूरा करना चाहते हैं लेकिन उसके लिए उन्हें योग्य नहीं ठहराया जाता। साथ ही निजी कंपनियों में भी उन्हें बेहतर पगार नहीं मिलती। पढ़ रहे विद्यार्थियों ने कहा था कि इस कोर्स का संचालन केमिस्ट्री विभाग से होना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को बेहतर जॉब मिल सकें। यह मांग वह कई बार कर चुके हैं लेकिन विश्वविद्यालय ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उसके बाद विद्यार्थी हाईकोर्ट पहुंचे। वहां से हाईकोर्ट ने भी पीयू से कहा है कि वह विद्यार्थियों की मांग पर ध्यान दें लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जैसा चल रहा था वैसा ही है। विद्यार्थियों का कहना है कि अधिकारी कुछ नया नहीं करना चाहते हैं। हाईकोर्ट में विद्यार्थियों ने कई विश्वविद्यालयों में चल रहे एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री पाठ्यक्रमों का रिकॉर्ड भी दिया है। अब छात्र फिर से हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। डीयूआई प्रो. आरके सिंगला कहते हैं कि अभी पुराने स्टेट्स के मुताबिक ही पाठ्यक्रम चल रहा है। बदलाव के बारे में सोचा जाएगा।
विज्ञापन
पीयू के यूआईसीईटी विभाग से एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री कोर्स संचालित है। कई वर्षों से इसकी पढ़ाई हो रही है। कई बैच पास हो चुके हैं। पास होने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा संकट रोजगार का आ रहा है। कॉलेज व विश्वविद्यालयों में वह शिक्षक बनकर अपना सपना पूरा करना चाहते हैं लेकिन उसके लिए उन्हें योग्य नहीं ठहराया जाता। साथ ही निजी कंपनियों में भी उन्हें बेहतर पगार नहीं मिलती। पढ़ रहे विद्यार्थियों ने कहा था कि इस कोर्स का संचालन केमिस्ट्री विभाग से होना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को बेहतर जॉब मिल सकें। यह मांग वह कई बार कर चुके हैं लेकिन विश्वविद्यालय ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उसके बाद विद्यार्थी हाईकोर्ट पहुंचे। वहां से हाईकोर्ट ने भी पीयू से कहा है कि वह विद्यार्थियों की मांग पर ध्यान दें लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जैसा चल रहा था वैसा ही है। विद्यार्थियों का कहना है कि अधिकारी कुछ नया नहीं करना चाहते हैं। हाईकोर्ट में विद्यार्थियों ने कई विश्वविद्यालयों में चल रहे एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री पाठ्यक्रमों का रिकॉर्ड भी दिया है। अब छात्र फिर से हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। डीयूआई प्रो. आरके सिंगला कहते हैं कि अभी पुराने स्टेट्स के मुताबिक ही पाठ्यक्रम चल रहा है। बदलाव के बारे में सोचा जाएगा।
विज्ञापन