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Highcourt: छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोपी शिक्षक को जमानत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा-यह विनाशकारी स्थिति

Thu, 12 Sep 2024 01:17 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 12 Sep 2024 01:17 PM IST
सार

भिवानी के एक सरकारी स्कूल शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। याची पर अपनी छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने और छात्रा को स्कूल से निकालने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।

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High Court denies bail to teacher accused of sending objectionable messages to student
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोपी शिक्षक को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से इनकार करते हुए कहा कि यह विनाशकारी स्थिति है और ऐसे कृत्य से जनता का शिक्षण संस्थान में विश्वास खत्म होता है।
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भिवानी के एक सरकारी स्कूल शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। याची पर अपनी छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने और छात्रा को स्कूल से निकालने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। याची ने कहा कि वह सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी शिक्षक है और इससे पहले उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई थी। उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने दलील दी कि याची छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेज रहा और बाद में उसे हटा दिया। सच्चाई को सामने लाने के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है और ऐसे में अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाए।
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सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षक द्वारा बच्चे का यौन शोषण विनाशकारी प्रभाव डालता है। इसका असर बच्चे के मानसिक विकास और पूरे समाज पर पड़ता है। विश्वासघात का यह कृत्य बच्चे के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक विकास को बाधित करता है। यह मानसिक पीड़ा और दीर्घकालिक भावनात्मक डर पैदा करता है। ऐसा कृत्य पारंपरिक रूप से पवित्र गुरु-शिष्य के रिश्ते से छात्र का विश्वास खत्म करता है। इससे सुरक्षा और सम्मान की भावना के स्थान पर भय, भ्रम और शर्म आ जाती है।
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साथ ही शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों में विश्वास को खत्म करता है। जब कोई शिक्षक अपने पद का दुरुपयोग करता है तो वह शिक्षण के लिए सुरक्षित स्वर्ग माने जाने वाले संस्थानों में सामाजिक विश्वास को भी कमजोर करता है। प्रथम दृष्टया याची को फंसाया गया है ऐसा सबूत नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची को अग्रिम जमानत का हकदार न मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
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