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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा-जब अज्ञानी राजा ईर्ष्या का शिकार होता है, तो प्रजा सहती है
Fri, 05 Feb 2021 10:59 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 05 Feb 2021 10:59 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में खेल कोटे से एचसीएस की भर्ती से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। सीनियर आईएएस की शिकायत के बाद जूनियर आईएएस के बेटे अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज विश्वजीत सिंह को नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में 1768 में थॉमस ग्रे द्वारा लिखित कविता का एक हिस्सा शामिल किया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि अज्ञानता का एक अलग आनंद होता है लेकिन यह बहुत छोटी अवधि के लिए होता है। अक्सर अज्ञानता का आनंद लेते हुए इसके दूरगामी परिणामों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जब एक अज्ञानी राजा ईर्ष्या का शिकार हो जाता है तो इसका कहर उसके अधीन राजाओं और प्रजा को झेलना पड़ता है।
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मामला हरियाणा में खेल कोटे से एचसीएस की भर्ती से जुड़ा हुआ है। सीनियर आईएएस की शिकायत के बाद जूनियर आईएएस के बेटे अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज विश्वजीत सिंह को नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था। इस मामले में सीनियर आईएएस ने याची के खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट पर ही सवाल उठा दिए थे। उन्होंने एचसीएससी चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा था कि याची के पिता के खेल निदेशक पद से तबादले के दिन ही याची को ए ग्रेड का प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
वरिष्ठ आईएएस ने मामले की जांच और पिता-पुत्र पर केस दर्ज करने की सरकार से मांग की थी। इसके बाद सरकार ने नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि खेल कोटा में उसकी पहली रैंक थी। बावजूद इसके दूसरी रैंक वाले को नियुक्ति दी गई। याची के दस्तावेज में कोई खामी नहीं है और वह किसी भी जांच के लिए तैयार है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकार्ड में पाया कि सर्टिफिकेट में कोई खामी नहीं है। इसके बाद याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने अन्य आवेदकों की नियुक्ति की तिथि से उसे वरिष्ठता प्रदान कर नियुक्तिपत्र जारी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सीनियर आईएएस और जूनियर आईएएस के बीच के विवाद में याची को पिसने नहीं दिया जा सकता है।