फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court cancels 20 years sentence in pocso act

हाईकोर्ट ने रद्द की 20 साल की सजा: भीड़ भरी जगह से आरोपी के साथ निकली थी पीड़िता, शोर क्यों नहीं मचाया

Sat, 30 Nov 2024 02:31 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 30 Nov 2024 02:31 PM IST
सार

जालंधर निवासी व्यक्ति ने 2017 के मामले में अगस्त 2022 को जालंधर कोर्ट द्वारा पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाई गई 20 साल के कठोर कारावास की सजा के आदेश को चुनौती दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी और याची ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

विज्ञापन
High Court cancels 20 years sentence in pocso act
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर कोर्ट द्वारा पॉक्सो एक्ट में सुनाई गई 20 साल की कठोर सजा के फैसले को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता भीड़भाड़ वाली जगह पर याची की बाइक के पीछे की सीट पर बैठी थी। उसने शोर नहीं मचाया। जो यह दर्शाता है कि संबंध पूरी तरह से सहमति से था। किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई।
विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी व्यक्ति ने 2017 के मामले में अगस्त 2022 को जालंधर कोर्ट द्वारा पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाई गई 20 साल के कठोर कारावास की सजा के आदेश को चुनौती दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी और याची ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। प्रस्तुतियों और रिकाॅर्ड पर उपलब्ध सामग्री की जांच करने पर खंडपीठ ने पाया कि पीड़िता की उम्र संदिग्ध है, इसलिए यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वह नाबालिग थी और सहमति देने में असमर्थ थी। जिस स्कूल में पीड़िता पढ़ती थी, उसकी प्रिंसिपल ने बताया था कि रजिस्टर में प्रविष्टि गांव के चौकीदार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। चूंकि चौकीदार की रिपोर्ट साबित नहीं हुई है, इसलिए रिकाॅर्ड विश्वसनीय नहीं है।
विज्ञापन


मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के गुप्तांग से जो शुक्राणु मिले वह याची से मेल नहीं खाते थे। पीड़िता के शरीर के किसी भी हिस्से पर कोई आंतरिक या बाहरी चोट के निशान नहीं थे। जब पीड़िता मोटरसाइकिल पर भीड़भाड़ वाली जगहों से गुजरी,उस समय वह चीखकर राहगीरों की मदद मांग सकती थी। पीड़िता स्वेच्छा से अभियुक्त के साथ थी। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए अभियुक्त को बरी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed