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शराबबंदी से बचने के लिए हो रही तैयारी, ये निकाला जा रहा है रास्ता

Fri, 07 Apr 2017 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 07 Apr 2017 11:32 PM IST
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high court bench to hear pleas on highway liquor-ban
शराब का कारोबार
शराबबंदी से शराब का कारोबार करने वालों की नींद हराम हो चुकी है। जिसके बाद शराबबंदी से बचने का रास्ता तलाशा जा रहा है।  सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से 16 मार्च को की गई नोटिफिकेशन के माध्यम से मध्य मार्ग का स्टेट हाईवे का दर्जा डी नोटिफाई न करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में मध्य मार्ग के सात रेस्टोरेंट्स और बार मालिकों ने हाईकोर्ट में दस्तक दी है। उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की है।
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मामले में याचिका दाखिल कर कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण शहर के ज्यादातर ठेके बंद हो रहे थे। यहां व्यापारिक हितों को देखते हुए नेशनल हाईवे-21 और मध्य मार्ग को छोड़कर अन्य सभी सड़कों को मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया गया। याची ने कहा कि इन दो सड़कों को छोड़कर अन्य सभी स्थानों पर मौजूद ठेके बच गए हैं, जबकि इनके 500 मीटर के दायरे में मौजूद सभी शराब के ठेके और बार बंद हो गए हैं।
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मध्य मार्ग पर चल रहे रेस्टोरेंट्स व बार जहां शराब सर्व की जाती थी उनका व्यवसाय पूरी तरह से बंद हो गया है। याची ने अपील की है कि मध्य मार्ग को भी स्टेट हाईवे से डी-नोटिफाई कर वी-2 रोड्स की तर्ज पर मेजर डिस्ट्रिक रोड घोषित किया जाए।
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यह है मामला
दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए थे कि सभी नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में ठेके और शराब के सर्व करने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से शहर के ज्यादातर ठेकों पर ताला लगना तय हो गया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने इससे बचने के लिए नेशनल हाईवे-21 और मध्य मार्ग को छोड़ अन्य सभी वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कों को मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया, जिन्हें पहले स्टेट हाईवे का दर्जा था।

मध्य मार्ग को इससे उपेक्षित रखने को इस मार्ग पर स्थित रेस्टोरेंट्स के मालिकों ने चुनौती दी है। याची ने कहा कि प्रशासन को मध्य मार्ग को भी डी-नोटिफाई करना चाहिए था, क्योंकि मध्य मार्ग स्टेट हाईवे न होकर वी-2 रोड है।

स्टेट हाईवे न होने का यह दिया तर्क

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
याची ने कहा कि प्रशासन के अनुसार, मध्य मार्ग एक ओर से मुल्लांपुर और दूसरी ओर से पंचकूला से जुड़ा है और ऐसे में यह स्टेट हाईवे है। याची ने कहा कि प्रशासन का नजरिया गलत है, क्योंकि चंडीगढ़ मास्टर-प्लान के अनुसार मध्य मार्ग पीजीआई से शुरू होकर ट्रांसपोर्ट चौक पर समाप्त हो जाता है। ऐसे में यह स्टेट हाईवे नहीं है बल्कि वी-2 रोड है। याची ने अपील की कि जैसे प्रशासन ने शहर के अन्य अन्य सभी वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कों को डी-नोटिफाई किया है, उनकी तर्ज पर मध्य मार्ग का स्टेट हाईवे का दर्जा भी डी-नोटिफाई किया जाए।

मध्य मार्ग से जुड़ा है हजारों का रोजगार
याचिका में कहा गया कि मध्य मार्ग पर शहर के कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट्स और बार हैं। अगर इसे स्टेट हाईवे से डी-नोटिफाई कर इसे भी अन्य वी-2 रोड्स की तरह मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया जाता है तो यहां के रेस्टोरेंट्स और बार में शराब सर्व करने पर पाबंदी नहीं रहेगी। वर्तमान स्थिति में हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आ गया है।

याची ने कहा कि यदि प्रशासन अपने रुख पर रहा तो बेरोजगारी बढ़ने के साथ ही करोड़ों रुपये के व्यापार को खत्म करने के साथ ही अपने राजस्व का नुकसान भी करेगा। कई व्यापारियों की पूरी जीवन की कमाई दांव पर लगी है तो कई ने वित्तीय संस्थाओं से बड़ा कर्ज लिया हुआ है। अगर यहां शराब सर्व करने पर पाबंदी लगी रही तो उनका करोड़ों का नुकसान हो जाएगा।

समानता के आधार पर हमारा कारोबार भी बचाया जाए
याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट कर चुका है कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में स्टेट हाईवे को परिभाषित करने के लिए कोई कानून नहीं है। जब कानून के अभाव में बाकी हाईवे डी-नोटिफाई किए हैं तो संविधान में निहित समानता का अधिकार सामने आता है, इसके तहत राज्य के लिए सभी बराबर हैं। जब बाकी लोगों के कारोबार को बचाया गया है तो याची के कारोबार को बचाना भी प्रशासन की ड्यूटी बनती है।
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