फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court advice to trial court: Courts should not go out of CrPC and do not have the right to sentence till the last breath

ट्रायल कोर्ट को हाईकोर्ट की नसीहत : अदालतें सीआरपीसी से न जाएं बाहर, आखिरी सांस तक की सजा सुनाने का नहीं है अधिकार

Thu, 06 Jan 2022 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 06 Jan 2022 05:10 AM IST
सार

दुष्कर्म के मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोषियों को सुनाई थी आखिरी सांस तक कैद की सजा। हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में तब्दील किया, कहा ऐसी सजा सुनाने का अधिकार नहीं।

विज्ञापन
High Court advice to trial court: Courts should not go out of CrPC and do not have the right to sentence till the last breath
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

दुष्कर्म के एक मामले में दोषियों की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रायल कोर्ट को सीआरपीसी से बाहर जाकर सजा सुनाने का अधिकार नहीं है। ऐसा अधिकार केवल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को ही हासिल है।

विज्ञापन


दुष्कर्म के मामले में आरोपियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने जब सजा को देखा तो पाया कि इसमें आखिरी सांस तक दोनों आरोपियों को जेल में रखने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट जब जघन्य अपराध के लिए दंड तय करता है तो मृत्यु दंड के विकल्प में वह उम्रकैद की सजा सुनाते हुए अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ सकता। 
विज्ञापन


इस तरह की सजा देने का अधिकार हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट को अपील पर सुनवाई के दौरान है। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा के साथ आखिरी सांस तक की शर्त लगाई है जो उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील को तो खारिज कर दिया लेकिन सजा में संशोधन कर इससे आखिरी सांस तक की शर्त को हटाने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह था मामला
याचिका दाखिल करते हुए रिंकू और अनीश ने सोनीपत ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता ने पुलिस को शिकायत दी थी कि 18 फरवरी 2017 को जब वह जागे तो उनकी बेटी घर में मौजूद नहीं थी।


बाद में अनीश ने उसे फोन करके कहा कि उसने शिकायतकर्ता की बेटी को अगवा किया है और उसे छोड़ने के लिए 3 लाख रुपये देने होंगे। इस दौरान नशीला पदार्थ खिला कर दोनों ने पीड़िता से दुष्कर्म भी किया। अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी सजा के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे घृणित कृत्य के दोषी रहम के हकदार नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed