चुनावी वादों पर अमल की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने की मंजूर
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चुनाव के दौरान राजनीतिक नेताओं की ओर से नए-नए वादों का प्रचार कर वोट हासिल करने और फिर उन वादों को पूरा न करने के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंची याचिका बुधवार को मंजूर कर ली गई। जस्टिस परमजीत सिंह ढालीवाल ने एडवोकेट प्रदीप रापडिया की ओर से दायर याचिका पर करीब एक घंटे तक तर्क सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तय कर दी।
एडवोकेट रापडिया ने याचिका के जरिए, चुनाव घोषणा पत्र में किसानों से किए गए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के वादे को पूरा कराने की मांग की है। याची ने मामले में भाजपा और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला, हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़, पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और उसके अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और भारतीय निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया है।
याची ने सवाल उठाया है कि देश में भ्रामक विज्ञापनों और बाबाओं द्वारा ठगी के लिए तो कानून हैं, ऐसे में नेताओं द्वारा गलत या झूठे वादे करके सरकार बनाने के विरुद्ध सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? याची ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान किसानों से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने का वादा किया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया। ग्यारह साल पहले साल 2004 में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था, जिसके अध्यक्ष डॉ. एमएस स्वामीनाथन ने किसानों के हालात को बयान करते हुए अपनी रिपोर्ट 2007 में ही तत्कालीन सरकार को सौंप दी थी।
सत्तारूढ़ भाजपा के किसान मोर्चा के अध्यक्ष ओपी धनखड़ और उनके सहयोगी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव से पहले तक किसान संगठनों के साथ-साथ अर्धनग्न धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेते रहे। अब धनखड़ हरियाणा के कृषिमंत्री हैं, लेकिन स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की सरकार चर्चा भी नहीं कर रही।
याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसानों की हालत इतनी खराब है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो को हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों और आत्महत्याओं का विवरण देने के अलावा भारत में किसानों की आत्महत्या के मामलों का अलग चैप्टर जोड़ना पड़ा है। एनसीआरबी रिपोर्ट में लिखा है कि किसानों की आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण कर्ज में डूबना ही है। याचिका में चुनाव के दौरान किए गए वादों का अमल न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।