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जानिए, किस पौधे से होगा किस बीमारी का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 19 Mar 2014 01:13 PM IST
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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के हर्बल गार्डन अब नर्सरी के रूप में उभर रहे हैं। इसकी पहल गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-16 ने कर दी है।
स्कूल के गार्डन को अब नर्सरी बना दिया गया है, जहां अन्य स्कूल, एनजीओ और लोगों को मुफ्त हर्बल पौधे दिए जा रहे हैं। स्कूल का मकसद सिर्फ सिटी को हराभरा बनाना है। स्कूल की ओर से अभी तक 2600 हर्बल पौधे वितरित किए गए हैं।
60 हर्बल पौधे से सजा गार्डन
यह गार्डन ईको क्लब की ओर से 2002 में तैयार किया गया। इस गार्डन को मात्र दस पौधों से शुरू किया गया था, लेकिन आज शिक्षकों और विद्यार्र्थियों के सहयोग से इसमें 60 हर्बल और एरोमैटिक पौधे हैं।
गार्डन को स्कूल प्रिंसिपल अनुजीत कौर की अगुआई में तैयार किया गया है। इसकी देखरेख ईको क्लब इंचार्ज लेक्चरर नीरजा जैन और चंडीगढ़ ईको क्लब के कॉ-आर्डिटेनर, स्कूल ईको क्लब पैटर्न और पंजाबी लेक्चरर ओम प्रकाश कर रहे हैं।
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कैंसर और डेंगू के इलाज वाले पौधे यहां
गार्र्डन में शुगर कंट्रोल से लेकर डेंगू, मलेरिया, बालों और दांतों की बीमारियों वाली जड़ी-बूटियां भी उपलब्ध हैं। ईको क्लब कॉ-ओर्डिनेटर ओम प्रकाश ने बताया कि इस गार्डन में ऐसे हर्बल पौधे लगाए गए हैं, जिसकी पत्तियों से इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि यहां ऐसे पौधे नर्सरी में रखे गए हैं, जो शहर में आसानी से नहीं मिलते हैं।
गार्डन में खास हर्र्बल पौधे
स्टीविया: शुगर को कंट्रोल करता है।
नियाजबो: परफ्यूम और धूपबत्ती बनती है।
अकरकारा: दांतों को साफ करने और इसकी बीमारियों को जड़ से समाप्त करता है।
मंडोपरनी: कैंसर को फर्स्ट स्टेज पर रोक देता है।
सोहंजना: विटामिन-2, बी-6, बी-12 और विटामिन सी देता है।
कलमेध: मलेरिया जैसी बीमारी को खत्म करता है।
पिढबिरंगी: बालों के रूखेपान को दूर करता है।
गिलोए: डेंगू को ठीक करने के लिए लाभदायक।
बहेड़ा: खांसी दूर करना।
मरजल: खून को साफ करना।
निरगुंडी: जख्म ठीक करना।
टच मी नॉट: चोट, जख्म को ठीक करना।
सदाबहार: शुगर और कैंसर बीमारी के लिए लाभदायक।
पत्थरचट: किडनी की पथरी को हबने के लिए लाभदायक।
मुलेठी: खांसी रोकने के लिए फायदेमंद।
अप्रैल में दिए जाते हैं पौधे
स्कूल की ओर से गार्डन की नर्सरी से अप्रैल में पौधे दिए जाते हैं। यह पौधे चंडीगढ़ मेडिसनल प्लांट बोर्र्ड के सहयोग से दिए जाते हैं। पिछले साल अक्टूबर में 2600 पौधे दिए गए।
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स्कूल के गार्डन को अब नर्सरी बना दिया गया है, जहां अन्य स्कूल, एनजीओ और लोगों को मुफ्त हर्बल पौधे दिए जा रहे हैं। स्कूल का मकसद सिर्फ सिटी को हराभरा बनाना है। स्कूल की ओर से अभी तक 2600 हर्बल पौधे वितरित किए गए हैं।
60 हर्बल पौधे से सजा गार्डन
यह गार्डन ईको क्लब की ओर से 2002 में तैयार किया गया। इस गार्डन को मात्र दस पौधों से शुरू किया गया था, लेकिन आज शिक्षकों और विद्यार्र्थियों के सहयोग से इसमें 60 हर्बल और एरोमैटिक पौधे हैं।
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गार्डन को स्कूल प्रिंसिपल अनुजीत कौर की अगुआई में तैयार किया गया है। इसकी देखरेख ईको क्लब इंचार्ज लेक्चरर नीरजा जैन और चंडीगढ़ ईको क्लब के कॉ-आर्डिटेनर, स्कूल ईको क्लब पैटर्न और पंजाबी लेक्चरर ओम प्रकाश कर रहे हैं।
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कैंसर और डेंगू के इलाज वाले पौधे यहां
गार्र्डन में शुगर कंट्रोल से लेकर डेंगू, मलेरिया, बालों और दांतों की बीमारियों वाली जड़ी-बूटियां भी उपलब्ध हैं। ईको क्लब कॉ-ओर्डिनेटर ओम प्रकाश ने बताया कि इस गार्डन में ऐसे हर्बल पौधे लगाए गए हैं, जिसकी पत्तियों से इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि यहां ऐसे पौधे नर्सरी में रखे गए हैं, जो शहर में आसानी से नहीं मिलते हैं।
गार्डन में खास हर्र्बल पौधे
स्टीविया: शुगर को कंट्रोल करता है।
नियाजबो: परफ्यूम और धूपबत्ती बनती है।
अकरकारा: दांतों को साफ करने और इसकी बीमारियों को जड़ से समाप्त करता है।
मंडोपरनी: कैंसर को फर्स्ट स्टेज पर रोक देता है।
सोहंजना: विटामिन-2, बी-6, बी-12 और विटामिन सी देता है।
कलमेध: मलेरिया जैसी बीमारी को खत्म करता है।
पिढबिरंगी: बालों के रूखेपान को दूर करता है।
गिलोए: डेंगू को ठीक करने के लिए लाभदायक।
बहेड़ा: खांसी दूर करना।
मरजल: खून को साफ करना।
निरगुंडी: जख्म ठीक करना।
टच मी नॉट: चोट, जख्म को ठीक करना।
सदाबहार: शुगर और कैंसर बीमारी के लिए लाभदायक।
पत्थरचट: किडनी की पथरी को हबने के लिए लाभदायक।
मुलेठी: खांसी रोकने के लिए फायदेमंद।
अप्रैल में दिए जाते हैं पौधे
स्कूल की ओर से गार्डन की नर्सरी से अप्रैल में पौधे दिए जाते हैं। यह पौधे चंडीगढ़ मेडिसनल प्लांट बोर्र्ड के सहयोग से दिए जाते हैं। पिछले साल अक्टूबर में 2600 पौधे दिए गए।