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Hindi News ›   Chandigarh ›   Heera Lal Yadav on 14th India Tour for Beti Bchao Awareness

बेटे से मिली नसीहत देश में बांटेंगे, वो भी दर्द सहकर

Wed, 18 Feb 2015 04:18 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट Updated Wed, 18 Feb 2015 04:18 PM IST
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Heera Lal Yadav on 14th India Tour for Beti Bchao Awareness

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए  बिना सीट की साइकिल पर चौदहवीं बार भारत की यात्रा पर निकले हैं वर्ल्ड साइकिल टूरिस्ट एवं लेखक हीरालाल यादव।

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हालांकि उनकी इस यात्रा में इस बार बेटी बचाने को संदेश सबसे अहम है। लेकिन नशा विरोधी, जल, पर्यावरण व वृक्ष संरक्षण, सांप्रदायिकता एकता और शहीदों के प्रति संवेदनाओं का संदेश भी उनकी इस यात्रा का हिस्सा है।
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मंगलवार को हीरालाल यादव की यात्रा अंबाला छावनी पहुंची। जहां हरियाणा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की ओर से उनके बड़े भाई राजिंद्र विज ने उनका भव्य स्वागत किया। इस स्वागत कार्यक्रम पर स्वास्थ्य मंत्री के भाई राजेंद्र विज ने हीरालाल यादव को उनकी यात्रा के लिए बधाई दी।
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उन्होंने कहा कि हीरालाल यादव जैसी सोच के अन्य व्यक्ति भी इसी तरह लोगों को जगाने में जीवन समर्पित करते रहे, तो वो दिन दूर नहीं, जब इस देश में बिगड़ा लिंगानुपात सुधर जाएगा। उन्होंने आह्वान किया कि हमें बेटी बचाने के लिए सामूहिक रूप से आगे आना चाहिए।

बेटे से नसीहत लेकर निकाली सीट

Heera Lal Yadav on 14th India Tour for Beti Bchao Awareness

भारत भ्रमण में यात्रा कर रहे हीरा लाल यादव ने कहा कि वह पहले एक आम आदमी की तरह की जिंदगी व्यतीत किया करते थे और धूम्रपान किया करते थे। लेकिन 1997 में हुई बेटे की घटना ने उन्हें जागरुकता यात्रा निकालने के मजबूर कर दिया।

उन्होंने साढ़े तीन साल के बेटे को सिगरेट के टुकड़े उठाकर मुंह में लगाते देखा। तभी से वे विचलित हो गए। बस, तभी से खुद को कष्ट देकर नशा और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लोगों को जगाने के लिए घर से निकल पड़े।

उन्होंने साइकिल की सीट निकाली और खड़े होकर ही देश-विदेश की जागरूकता यात्राएं शुरू की। यात्रा खत्म होने के बाद वे अपना समय परिवार के साथ बिताते हैं। लेकिन फिर नई यात्रा पर निकल जाते हैं।

कई देशों में जागरूकता यात्रा कर चुके हैं हीरालाल

Heera Lal Yadav on 14th India Tour for Beti Bchao Awareness

इस अवसर पर हीरा लाल यादव ने बताया कि वह लाओस, वियतनाम, कंबोडिया व थाइलैंड की जागरूकता यात्रा भी कर चुके हैं। वह 1997 से इस यात्रा में निकले हुए हैं और करीबन एक लाख किमी. की यात्रा बिना सीट की साइकिल पर कर चुके हैं। उनके अनुसार जब तक वह जिंदा रहेंगे, लोगों को जगाने का काम करते रहेंगे।

इस दौरान उन्होंने ‘लो अब संभालो प्यारा वतन, हम तो चले ये जहां छोड़कर’ कविता भी प्रस्तुत की। उसके उपरांत रेस्ट हाउस में पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ अभियान के तहत प्रोफेसर देसवाल के नेतृत्व में पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें हीरालाल यादव समेत अभी अतिथिगणों ने पौधे लगाए।

‘अमर उजाला’ की मुहिम को सराहा
हीरालाल यादव ने ‘अमर उजाला’ की ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा उन्हें इस अभियान के बारे में मालूम है। ये सराहनीय अभियान है। उनके अनुसार इसी तरह अन्य संस्थाएं भी इस तरह के मुद्दों को लेकर सामाजिक जागरूकता फैलाएं तो जरूरी बेटियां बचेगी और ये भी सच बात है कि बेटी ही इस जग को बचाएगी। क्योंकि बेटी के बिना जीवन की कल्पना करना व्यर्थ है।

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