पंजाब में पांच जिलों के किसानों पर बारिश की मार, ओलों ने बर्बाद की फसल
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किसानों के अरमानों पर मौसम का कहर एक बार फिर टूटा है। पंजाब में बारिश, ओलों और तेज हवाओं ने कई जिलों में तबाही मचाई। धान की पकी फसल बर्बाद हो गई। बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह तक हुई बेमौसम बरसात ने धान की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। पंजाब के दस जिलों में बारिश हुई। पांच जिलों, अमृतसर, गुरदासपुर, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला में ओलों और बारिश से फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।
माहिरों का कहना है कि इस बेमौसम बरसात से धान की फसल प्रभावित होगी, उत्पादन में कमी आएगी। धान में नमी की मात्रा काफी बढ़ जाएगी। फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से सिर्फ 17 प्रतिशत नमी तक वाले धान की खरीद की इजाजत है। लेकिन नमी इससे कहीं ज्यादा होगी। इतना ही नहीं, फसल की कटाई और लेट हो जाएगी।
जिससे अगली गेहूं की फसल भी लेट हो सकती है। समय की कमी के कारण पराली जलाने के मामले भी बढ़ेंगे। गौरतलब है कि सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी पंजाब में तीन दिन लगातार बारिश से धान, कपास समेत सभी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। अब फिर धान पर मौसम का कहर टूट पड़ा।
पांच जिलों में कितना नुकसान
रोपड़ - आनंदपुर साहिब में बारिश, आंधी, ओलों से 2500 एकड़ फसल बिछ गई, 2-3 प्रतिशत नुकसान की आशंका।
फतेहगढ़ साहिब - खेड़ा ब्लॉक के कुछ गांवों के 1500 एकड़ रकबे में ओले पड़े। खमाणो में 500 एकड़ फसल बिछ गई। 2-3 प्रतिशत नुकसान का अनुमान।
पटियाला - राजपुरा और घनौर ब्लॉकों के कुछ गांवों में ओले पड़े।
गुरदासपुर - कलानौर ब्लॉक और कुछ अन्य गांवों में ओलों से नुकसान।
अमृतसर - अजनाला में 4000 एकड़ रकबा 80 प्रतिशत तक, हरशा छीना का 650 एकड़ रकबा 8 प्रतिशत तक, वेरका का 3250 एकड़ रकबा 30 प्रतिशत तक, मजीठा का 3000 एकड़ रकबा 50 फीसदी तक बारिश और ओलों से प्रभावित हुआ है।
जिला - बरसात (मिमी)
अमृतसर - 9.2 (ओलावृष्टि भी)
फतेहगढ़ साहिब - 1.5 (ओलावृष्टि भी)
गुरदासपुर - 14.0 (ओलावृष्टि भी)
पटियाला - 11.7 (ओलावृष्टि भी)
रोपड़ - 15.5 (ओलावृष्टि भी)
होशियारपुर - 1.4
कपूरथला - हल्की बारिश
मोहाली - 2.0
पठानकोट - 26.5
तरनतारन - 4.0
दस जिलों में बारिश हुई है, पांच में ओले पड़े हैं, कुछ जगह तेज हवाओं से फसल बिछ गई है, 2-3 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है। धान की कटाई लेट हो जाएगी, नमी की मात्रा बढ़ जाएगी। जिससे खरीद में दिक्कत आएगी।- डॉ. जसबीर बैंस, डायरेक्टर, खेतीबाड़ी विभाग