बदल रहा मौसम: जून का दूसरा हफ्ता आया, इस साल एक भी दिन नहीं चली लू, आगे भी आसार कम
पिछले साल भी जून के दूसरे सप्ताह तक पश्चिमी विक्षोभ आते रहे। इस साल भी यही हालात बने हैं। जब तक तापमान नहीं बढ़ेंगे तब तक लू की संभावना नहीं रहती है।
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जून के दूसरे हफ्ते की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अब तक एक भी दिन लू रिकार्ड नहीं हुई है। यह लगातार दूसरा साल है, जब गर्मी के सीजन में गर्म हवा नहीं चली है। साल 2020 में भी लू गायब रही। अगले चार से पांच दिन भी गर्म हवा चलने के आसार नहीं हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक तापमान के साथ हवा में नमी बढ़ेगी, मगर लू की संभावना नहीं है। 11-12 जून को फिर एक मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जो बारिश के साथ तापमान में कमी लाएगा। जून के आगे दिनों में भी इसी तरह के हालात बने रहेंगे। 27 जून के आसपास मानसून आ जाएगा। उसके बाद तो लू चलने के बिलकुल भी आसार नहीं हैं।
आमतौर पर अप्रैल व मई में लू चलती है। पिछले एक साल से जब-जब तापमान बढ़ा तो उसके कुछ ही दिनों बाद पश्चिमी विक्षोभ आ गए। इससे तापमान सामान्य के नीचे ही दर्ज किए गए। जून का पहला हफ्ता बीत चुका है, इसके बावजूद तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किए जा रहे हैं।
सोमवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ, जो सामान्य से एक डिग्री कम रहा। रात का तापमान थोड़ा बढ़ा हुआ है। रविवार रात न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ, जो सामान्य से दो डिग्री ज्यादा रहा। पिछले साल भी जून के दूसरे सप्ताह तक पश्चिमी विक्षोभ आते रहे। इस साल भी यही हालात बने हैं। जब तक तापमान नहीं बढ़ेंगे तब तक लू की संभावना नहीं रहती है।
लू न चलने की दो बड़ी वजह
चंडीगढ़ मौसम विभाग के विशेषज्ञ ने बताया कि लू रिकार्ड न किए जाने की दो बड़ी वजह रही हैं। पहली, पश्चिमी विक्षोभ। अप्रैल से लेकर जून के पहले सप्ताह तक छोटे-बड़े मिलाकर 12-13 पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के इलाकों में बारिश व पहाड़ी एरिया में बारिश के साथ बर्फबारी होती है। दूसरी वजह चक्रवाती तूफान। भले ही चंडीगढ़ में चक्रवाती तूफान की वजह से बारिश न हुई हो, लेकिन तापमान में कमी जरूर आई।
इसका भी प्रभाव तीन से चार दिन बना रहा। एक वजह नमी वाली हवाएं भी हैं। इस बार समय से पहले नमी वाली हवाएं उत्तर भारत की ओर चलने लगी। जब भी तापमान बढ़ने के साथ नमी वाली हवाएं आएंगी, तो उस स्थिति में भी बारिश होती है। जैसा कि पिछले दिनों देखा गया कि एक तूफान आया था, जो नमी वाली हवाओं की वजह से हुआ था। ये जल्दी बनते हैं और तेज बारिश व हवा के साथ निकल जाते हैं।
कब घोषित होती है लू की स्थिति
लू की स्थिति तब घोषित की जाती है, जब अधिकतम तापमान 45 डिग्री के साथ सामान्य से चार से पांच डिग्री ज्यादा हो। उस वक्त मौसम विभाग की ओर से रेड अलर्ट जारी कर लोगों को आगाह किया जाता है। पिछले साल भी तापमान 42 डिग्री के पार नहीं गया और इस बार एक दिन 42 डिग्री गया, लेकिन उसके अगले ही दिन नीचे आ गया।
अब बढ़ेगा तापमान
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि अगले तीन दिन तापमान बढ़ सकते हैं। मौसम शुष्क रहेगा। कोई भी मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं है। इससे तापमान 42 से 41 डिग्री के बीच दर्ज किए जा सकते हैं। साथ ही हवा में नमी की मात्रा भी बढ़ने के आसार हैं। मंगलवार को हवा में नमी की अधिकतम मात्रा 61 फीसदी और न्यूनतम मात्रा 40 फीसदी रिकार्ड की गई।
लगातार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ व ताउते की वजह से कई दिनों से तापमान सामान्य से नीचे आए हैं। यह बात बिलकुल सही है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा संख्या में आ रहे हैं। जैसे मानसून का विज्ञान है, वैसे पश्चिमी विक्षोभ कोई विज्ञान नहीं है। इसलिए इसे वेस्टर्न डिस्टरबेंस कहते हैं। यह शोध का विषय है कि पश्चिमी विक्षोभ क्यों ज्यादा आ रहे हैं और इनका ज्यादा आना अच्छी बात भी नहीं है। इससे फसल चक्र बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। - एके सिंह, निदेशक मौसम विभाग चंडीगढ़
यह बात सही है कि प्रदूषण में कमी आई है, लेकिन मौसम में आ रहे बदलावों के पीछे प्रदूषण में कमी का सीधा ताल्लुक नहीं है। यदि आने वाले सालों में भी यही स्थिति बनती है तो इसके वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन इसका एक मुख्य कारण है, जिससे कुछ साल सामान्य व कुछ असामान्य हो सकते हैं। - रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर इन्वायरमेंट हेल्थ पीजीआई