बेमिसाल: धड़कते दिल ने चंडीगढ़ से भरी उड़ान, 2500 किमी दूर चेन्नई में बचाई अजनबी की जान
ह्रदय का मिलान होने पर चंडीगढ़ से दिल चेन्नई भेजा गया। ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से महज 22 मिनट में दिल को पीजीआई से चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचाया गया। रात साढ़े आठ बजे दिल चेन्नई पहुंचा। यहां 52 वर्षीय व्यक्ति में इसे प्रत्यारोपित किया गया।
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पीजीआई ने यूटी प्रशासन और यातायात विभाग के साथ मिलकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया और धड़कते दिल को चेन्नई भेजकर एक शख्स को नई जिंदगी दे दी। यह पहली बार है जब चंडीगढ़ से किसी दिल को प्रत्यारोपण के लिए 2500 किलोमीटर दूर भेजा गया है। सरकारी विभागों के शानदार समन्वय के कारण चंडीगढ़ ने यह उपलब्धि हासिल की है।
चार दिसंबर को सड़क दुर्घटना का शिकार होकर 45 साल का शख्स पीजीआई पहुंचा। उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। तमाम प्रयासों के बाद जब सफलता नहीं मिली तो सात दिसंबर को 11.30 बजे उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजनों से अंगदान की अनुमति मांगी गई। मंजूरी मिलते ही टीम ने लीवर, दोनों किडनी और दोनों कार्निया प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों में प्रत्यारोपित कर दिए जबकि दिल को हवाई जहाज के जरिए चेन्नई भेजा गया। इस तरह जाते-जाते यह फरिश्ता छह लोगों को जिंदगी दे गया।
22 मिनट में एयरपोर्ट, रात 8.30 बजे चेन्नई
पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों से हृदय का मिलान होने पर उसकी सूचना अन्य सेंटरों पर दी गई। पता चला कि चेन्नई के एक मरीज को उसी ग्रुप के हृदय की जरूरत है। सूचना मिलते ही ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महज 22 मिनट में उसे पीजीआई से चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर बुधवार दोपहर 3.25 बजे पहुंचाया गया। विस्तारा एयरलाइंस के जरिए हृदय को रात 8.30 बजे चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां 52 वर्षीय पुरुष में उसे प्रत्यारोपित कर दिया गया।
परिवार के आभारी, दुख की घड़ी में लिया साहसिक निर्णय
दाता परिवार के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूं। उस दु:ख की घड़ी में किसी अजनबी की जान बचाने के लिए अपने प्रिय के अंग को दान करने का निर्णय लेने वाले परिवार के हम ऋणी हैं। जहां तक ग्रीन कॉरिडोर की बात है तो प्रत्यारोपण में समय सबसे महत्वपूर्ण है। यह प्रशंसनीय है कि इतने कम समय में हृदय को 2500 किमी दूर चेन्नई पहुंचाया गया। -प्रो. सुरजीत सिंह, प्रभारी निदेशक पीजीआई