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ध्यान दें, इन जगहों पर गए तो हो सकता है मलेरिया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 08 Apr 2014 11:39 AM IST
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यदि आप मलेरिया को अब तक आम बीमारी समझ रहे थे तो नए ट्रेंड से आप हैरत में पड़ सकते हैं। पीजीआई की ओर से पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार सालों में मलेरिया के लक्षण काफी बदल गए हैं और उनकी मारक क्षमता में भी तेजी देखी गई।
मलेरिया के कई केसों में अब लक्षण में नहीं दिखाई देते। मलेरिया से लीवर और किडनी तो फेल होने लगे हैं साथ ही अब मौतें भी हो रही हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक इस रीजन में आम तौर पर मलेरिया दो परजीवी फ्लासीपुरम व वाइवक्स की वजह से होता है।
पहले प्लासीपुरम परजीवी के केस ज्यादा आ रहे थे, लेकिन पिछले चार साल में वाइवक्स के ज्यादा केस बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर अब मलेरिया पहले से ज्यादा खतरनाक हो गया है। मलेरिया का डंक अब मौत भी लेने लगा है।
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पीजीआई ने बताया कि साल 2004 में वाइविक्स के सिर्फ तीन केस सामने आए थे, जबकि 2013 में इसकी संख्या बढ़कर 39 हो गई है। बताया गया कि जब मच्छर प्रजनन करते हैं तभी वाइविक्स परजीवी पनपते हैं।
कब कितने केस
साल-------फ्लासीपरम-----वाइविक्स
2004----------23----------3
2011----------65----------62
2012----------40----------51
2013----------26----------39
सेक्टर व कालोनी के मच्छर में अंतर
वर्ल्ड हेल्थ डे के उपलक्ष्य पर पीजीआई ने बताया कि उनके विशेषज्ञों को शक है कि चंडीगढ़ के गांव और सेक्टरों में बसने वाले मच्छरों में अंतर है। इसे जानने के लिए पीजीआई का मेडिकल पैरासिटोलॉजी विभाग चंडीगढ़ में एक स्टडी शुरू करने जा रहा है। इसमें अरबन और रुरल इलाके के अलग-अलग जगहों पर सैंपल लिए जाएंगे और उन पर विस्तार से स्टडी की जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि मच्छर किस पनप रहे हैं।
पीजीआई व रोज गार्डन में मिले मच्छर
विशेषज्ञों ने बताया कि स्टडी शुरू हो गई और शुरुआती दौर में शहर के कई जगहों से सैंपल लिए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि पीजीआई के रेजिडेंशियल इलाकों व रोज गार्डन से भी उन्होंने मच्छरों के सैंपल भरे। रेजिडेंशियल कालोनी में मच्छर मिलने के बाद तुरंत पीजीआई के डाक्टरों को सूचना दे दी गई है। दूसरी तरफ रोज गार्डन में मच्छरों की काफी संख्या थी।
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मलेरिया के कई केसों में अब लक्षण में नहीं दिखाई देते। मलेरिया से लीवर और किडनी तो फेल होने लगे हैं साथ ही अब मौतें भी हो रही हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक इस रीजन में आम तौर पर मलेरिया दो परजीवी फ्लासीपुरम व वाइवक्स की वजह से होता है।
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पहले प्लासीपुरम परजीवी के केस ज्यादा आ रहे थे, लेकिन पिछले चार साल में वाइवक्स के ज्यादा केस बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर अब मलेरिया पहले से ज्यादा खतरनाक हो गया है। मलेरिया का डंक अब मौत भी लेने लगा है।
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पीजीआई ने बताया कि साल 2004 में वाइविक्स के सिर्फ तीन केस सामने आए थे, जबकि 2013 में इसकी संख्या बढ़कर 39 हो गई है। बताया गया कि जब मच्छर प्रजनन करते हैं तभी वाइविक्स परजीवी पनपते हैं।
कब कितने केस
साल-------फ्लासीपरम-----वाइविक्स
2004----------23----------3
2011----------65----------62
2012----------40----------51
2013----------26----------39
सेक्टर व कालोनी के मच्छर में अंतर
वर्ल्ड हेल्थ डे के उपलक्ष्य पर पीजीआई ने बताया कि उनके विशेषज्ञों को शक है कि चंडीगढ़ के गांव और सेक्टरों में बसने वाले मच्छरों में अंतर है। इसे जानने के लिए पीजीआई का मेडिकल पैरासिटोलॉजी विभाग चंडीगढ़ में एक स्टडी शुरू करने जा रहा है। इसमें अरबन और रुरल इलाके के अलग-अलग जगहों पर सैंपल लिए जाएंगे और उन पर विस्तार से स्टडी की जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि मच्छर किस पनप रहे हैं।
पीजीआई व रोज गार्डन में मिले मच्छर
विशेषज्ञों ने बताया कि स्टडी शुरू हो गई और शुरुआती दौर में शहर के कई जगहों से सैंपल लिए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि पीजीआई के रेजिडेंशियल इलाकों व रोज गार्डन से भी उन्होंने मच्छरों के सैंपल भरे। रेजिडेंशियल कालोनी में मच्छर मिलने के बाद तुरंत पीजीआई के डाक्टरों को सूचना दे दी गई है। दूसरी तरफ रोज गार्डन में मच्छरों की काफी संख्या थी।