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अनोखी रिसर्च: अब बॉडी को बीमारियों से बचाएंगे कपड़े
विनीत तोमर /अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 16 Mar 2016 03:25 PM IST
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शोध
- फोटो : फाइल फोटो
माडर्न लुक के साथ-साथ अब कपड़े आपको त्वचा के रोगों से भी बचाएंगे। ऐसे कपड़े पहनने से त्वचा रोग के साथ-साथ सांस और अन्य संक्रमण से भी निजात मिलेगी। इन कपड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन्हें तैयार करने में प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। रोहतक की स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट में इस कवायद को लेकर काम चल रहा है।
जड़ी बूटियों का कर रहे इस्तेमाल
बेडशीट और अन्य कपड़ों को रंगने के लिए डाई (रंग) का इस्तेमाल होता है। इस सिंथेटिक डाई को तैयार करने के लिए केमिकल का भी प्रयोग होता है। इसे तैयार करने और पकाने के लिए आग का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस केमिकल से प्रदूषण फैलता है। साथ ही तैयार होने वाले कपड़ों से स्किन एलर्जी होने का भी खतरा रहता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट में नेचुरल डाई से कपड़े तैयार होंगे। इसमें घरेलू उपयोग में आने वाली आयुर्वेदिक चीजों के अलावा जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
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जड़ी बूटियों का कर रहे इस्तेमाल
बेडशीट और अन्य कपड़ों को रंगने के लिए डाई (रंग) का इस्तेमाल होता है। इस सिंथेटिक डाई को तैयार करने के लिए केमिकल का भी प्रयोग होता है। इसे तैयार करने और पकाने के लिए आग का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस केमिकल से प्रदूषण फैलता है। साथ ही तैयार होने वाले कपड़ों से स्किन एलर्जी होने का भी खतरा रहता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट में नेचुरल डाई से कपड़े तैयार होंगे। इसमें घरेलू उपयोग में आने वाली आयुर्वेदिक चीजों के अलावा जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
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यूनिवर्सिटी में शुरू हुआ रिसर्च पर काम
शोध
- फोटो : फाइल फोटो
पिछले दिनों यूनिवर्सिटी में हुई कार्यशाला में विद्यार्थियों को हल्दी, चुकंदर और प्याज के छिलके आदि चीजों से नेचुरल डाई के इस्तेमाल का तरीका बताया गया। इस कार्यशाला में नेचुरल डाई पर काम कर रहे जयपुर से अवधेष पांडे (राष्ट्रपति अवार्ड विजेता) और डिपार्टमेंट को-ऑर्डिनेटर निहारिका ने छात्रों को इसका प्रशिक्षण दिया था। अब यूनिवर्सिटी की तैयारी है कि डाई को नीम और चंदन आदि जड़ी-बूटियों से तैयार कर कपड़ों में लगाया जाए।
एंटीबायोटिक और एंटी एलर्जिक होंगे कपड़े
जड़ी-बूटियों से तैयार होने वाली डाई से एंटीबायोटिक और एंटी एलर्जिक कपड़े बनाए जाएंगे। इन कपड़ों से त्वचा से संबंधी रोगों से निजात मिलेगी। इसके अलावा मरीजों को भी इसका फायदा होगा।
यह बोले वीसी
केमिकल डाई से स्किन पर प्रभाव पड़ता है। यूनिवर्सिटी में नेचुरल डाई पर काम शुरू कर दिया गया है। इसे बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक संस्थानों से भी बात की जा रही है। नेचुरल डाई से तैयार होने वाले कपड़े बीमारी रोधक होंगे।
- अश्वनी संभरवाल, कुलपति, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स
एंटीबायोटिक और एंटी एलर्जिक होंगे कपड़े
जड़ी-बूटियों से तैयार होने वाली डाई से एंटीबायोटिक और एंटी एलर्जिक कपड़े बनाए जाएंगे। इन कपड़ों से त्वचा से संबंधी रोगों से निजात मिलेगी। इसके अलावा मरीजों को भी इसका फायदा होगा।
यह बोले वीसी
केमिकल डाई से स्किन पर प्रभाव पड़ता है। यूनिवर्सिटी में नेचुरल डाई पर काम शुरू कर दिया गया है। इसे बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक संस्थानों से भी बात की जा रही है। नेचुरल डाई से तैयार होने वाले कपड़े बीमारी रोधक होंगे।
- अश्वनी संभरवाल, कुलपति, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स