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कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए राहत भरी खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 20 Apr 2014 11:41 AM IST
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सेक्टर-छह के जनरल अस्पताल में कुपोषित बच्चों के इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए यहां अस्पताल के नूट्रिशनल रिहेबिलटेशन सेंटर (एनआरसी) खोला गया है। यह प्रोजेक्ट नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) द्वारा पायलट प्रोजोक्ट के तहत इसकी शुरुआत की गई है।
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अभी तक एनआरसी के तहत दो बच्चों का इलाज हुआ है। इसके तहत कुपोषित बच्चों का इलाज 15 दिन से डेढ़ माह तक किया जाएगा। अस्पताल की बिल्डिंग का नवीनीकरण कार्य पूरा होने के बाद इसके लिए अस्पताल में अलग वार्ड बनाया जाएगा और डॉक्टरों व अन्य स्टाफों की विशेष तौर पर नियुक्ति की जाएगी।
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पीएमओ डॉ. उषा गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंचकूला को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। ताकि जिले के ऐसे बच्चे जो कि कुपोषण के शिकार हैं, उनका मुफ्त इलाज किया जा सके। फिलहाल यह बाल रोग वार्ड व डीआईसी के साथ शुरू किया गया है।
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इसके तहत बच्चों के इलाज के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिसमें अलग-अलग शिफ्टों में दो डॉक्टर और चार नर्से और खाना बनाने के लिए स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों का समय पर चेकअप और उन्हें समय पर डाइट व दवा देने की जिम्मेदारी वहां तैनात डॉक्टरों व नर्सों की होगी।
इन बच्चों का होगा एनआरसी सेंटर में इलाज
- 14 वर्ष तक के बच्चों का होगा इलाज
- शारीरिक तौर पर पतले बच्चों का
- जिन बच्चों के पैरों में सूजन, चेहरे और पेट पर झुर्रियां पड़ी होंगी
- पांच साल के बच्चों की तादात ज्यादा होती है
कैसे होती हैं कुपोषित बच्चों की पहचान
फीते के माध्यम से भी कुपोषित बच्चों की पहचान कर सकते हैं। डॉ. रोहित ने बताया कि फीते से बच्चों के मिड आर्म का माप लिया जाता है। फीते में तीन रंग (हरा, पीला, लाल) होते हैं। इसमें हरे रंग से स्वस्थ्य बच्चों की, पीले रंग से बीमार बच्चों की, लाल रंग से कुपोषित बच्चों की पहचान होती है।