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एचसीएस चयन प्रक्रिया को चुनौती वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, हरियाणा सरकार को नोटिस
Fri, 06 Dec 2019 12:13 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 06 Dec 2019 12:13 PM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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एचसीएस की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव, हरियाणा लोक सेवा आयोग, तहसीलदार और जिला राजस्व अधिकारी पद से एचसीएस के लिए चयनित 21 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। करनाल के जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 17 नवंबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित परिणाम पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें रजिस्टर ए 1 के तहत तहसीलदार-जिला राजस्व अधिकारी से एचसीएस सिविल के लिए चयन किया गया है।
मामले में बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील कर्मवीर सिंह बनयाना ने बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता को उसका विभाग एचसीएस के लिए योग्य उम्मीदवार मानकर उसके नाम की सिफारिश कर रहा है लेकिन लोक सेवा आयोग अयोग्य मान रहा है। जबकि उसकी एसीआर में किसी तरह की कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं है। याची के वकील ने बताया कि हरियाणा सरकार ने पिछले साल मई माह में रजिस्टर ए 1 के तहत तहसीलदार-जिला राजस्व अधिकारी से एचसीएस सिविल 23 पदों के लिए आवेदन मांगे थे।
राजस्व विभाग के वितायुक्त ने याचिकाकर्ता को योग्य मान कर उसका नाम एचसीएस के लिए मुख्य सचिव को भेजा था। उसके बाद सितंबर माह में हरियाणा लोक सेवा आयोग ने उसका साक्षात्कार लिया। लेकिन जब आयोग ने परिणाम जारी किया तो उसका नाम चयन सूची में नहीं था। हैरान करने वाली बात यह थी कि कुल पद 23 थे जब कि आयोग ने केवल 21 उम्मीदवारों का चयन किया और दो पद रिक्त रखे गए। जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उसे बताया गया कि आयोग को केवल 21 योग्य उम्मीदवार ही मिले। इसलिए दो पद रिक्त रह गए।
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याची ने पूछा कि उसको किस आधार पर अयोग्य माना जा रहा है जबकि विभाग उसे योग्य मान कर उसका नाम भेज रहा है। याची ने हाईकोर्ट से मांग की कि वह उसका नाम चयन सूची में रखने का निर्देश जारी करें व मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन रहने तक इस सूची के क्रियान्वयन पर रोक लगाएं। याची के वकील की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को 17 दिसंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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मामले में बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील कर्मवीर सिंह बनयाना ने बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता को उसका विभाग एचसीएस के लिए योग्य उम्मीदवार मानकर उसके नाम की सिफारिश कर रहा है लेकिन लोक सेवा आयोग अयोग्य मान रहा है। जबकि उसकी एसीआर में किसी तरह की कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं है। याची के वकील ने बताया कि हरियाणा सरकार ने पिछले साल मई माह में रजिस्टर ए 1 के तहत तहसीलदार-जिला राजस्व अधिकारी से एचसीएस सिविल 23 पदों के लिए आवेदन मांगे थे।
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राजस्व विभाग के वितायुक्त ने याचिकाकर्ता को योग्य मान कर उसका नाम एचसीएस के लिए मुख्य सचिव को भेजा था। उसके बाद सितंबर माह में हरियाणा लोक सेवा आयोग ने उसका साक्षात्कार लिया। लेकिन जब आयोग ने परिणाम जारी किया तो उसका नाम चयन सूची में नहीं था। हैरान करने वाली बात यह थी कि कुल पद 23 थे जब कि आयोग ने केवल 21 उम्मीदवारों का चयन किया और दो पद रिक्त रखे गए। जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उसे बताया गया कि आयोग को केवल 21 योग्य उम्मीदवार ही मिले। इसलिए दो पद रिक्त रह गए।
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याची ने पूछा कि उसको किस आधार पर अयोग्य माना जा रहा है जबकि विभाग उसे योग्य मान कर उसका नाम भेज रहा है। याची ने हाईकोर्ट से मांग की कि वह उसका नाम चयन सूची में रखने का निर्देश जारी करें व मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन रहने तक इस सूची के क्रियान्वयन पर रोक लगाएं। याची के वकील की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को 17 दिसंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।