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18 लाख बिल का मामला: सरकार को 18 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 13 Dec 2017 09:35 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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डेंगू पीड़ित बच्ची के इलाज के लिए बनाए गए 18 लाख रुपये के बिल मामले मे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 18 जनवरी तक जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। प्रदेश सरकार ने इससे पहले कोर्ट को बताया कि जांच पूरी हो गई है और रिपोर्ट लगभग 1 हजार पेज से अधिक है, जिसे सौंपने के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने इसके साथ ही यूटी प्रशासन को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई पर एरिया वाइज डेंगू मामलों की रिपोर्ट पेश करें।
हाईकोर्ट द्वारा डेंगू के बढ़ते कहर पर संज्ञान लेकर सुनवाई आरंभ की गई थी। इस दौरान कोर्ट को सहयोग दे रहे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल में सात वर्षीय बच्ची का 15 दिन इलाज कर उसके पिता को 18 लाख का बिल थमाने की जानकारी दी। बाद में बच्ची की मृत्यु हो गई थी।
उन्होंने बताया कि बिल 15 पन्नों का था जिसमे 15 दिनों के इलाज के दौरान 660 सिरिंज और 2700 ग्लव्स के इस्तेमाल की बात कही गई। गुप्ता ने कहा यह बेहद ही हैरत की बात है कि एक मरीज के 15 दिनों के इलाज में 660 सिरिंज इस्तेमाल हों। इससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि 15 दिन के भीतर 2700 ग्लव्स का उपयोग हो गया। उन्होंने इस मामले में तत्काल हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किए जाने की मांग की थी।
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बड़े बिल को कोर्ट के सामने रखने के बाद अनुपम गुप्ता ने कहा था कि निजी अस्पतालों में अक्सर मोटे बिल बना दिए जाते हैं और हैरत तो तब होती है कि बिल की राशि जमा न होने तक शरीर को परिवार को सुपुर्द करने से इनकार कर दिया जाता है। गुप्ता ने कहा कि मृत शरीर परिवार को सौंपा जाना जरूरी होता है फिर भी मानमाने और असंवेदनशील रवैया अपनाते हुए अस्पताल गैर कानूनी तरीके से शव अपने पास रखते हैं।
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हाईकोर्ट द्वारा डेंगू के बढ़ते कहर पर संज्ञान लेकर सुनवाई आरंभ की गई थी। इस दौरान कोर्ट को सहयोग दे रहे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल में सात वर्षीय बच्ची का 15 दिन इलाज कर उसके पिता को 18 लाख का बिल थमाने की जानकारी दी। बाद में बच्ची की मृत्यु हो गई थी।
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उन्होंने बताया कि बिल 15 पन्नों का था जिसमे 15 दिनों के इलाज के दौरान 660 सिरिंज और 2700 ग्लव्स के इस्तेमाल की बात कही गई। गुप्ता ने कहा यह बेहद ही हैरत की बात है कि एक मरीज के 15 दिनों के इलाज में 660 सिरिंज इस्तेमाल हों। इससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि 15 दिन के भीतर 2700 ग्लव्स का उपयोग हो गया। उन्होंने इस मामले में तत्काल हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किए जाने की मांग की थी।
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बड़े बिल को कोर्ट के सामने रखने के बाद अनुपम गुप्ता ने कहा था कि निजी अस्पतालों में अक्सर मोटे बिल बना दिए जाते हैं और हैरत तो तब होती है कि बिल की राशि जमा न होने तक शरीर को परिवार को सुपुर्द करने से इनकार कर दिया जाता है। गुप्ता ने कहा कि मृत शरीर परिवार को सौंपा जाना जरूरी होता है फिर भी मानमाने और असंवेदनशील रवैया अपनाते हुए अस्पताल गैर कानूनी तरीके से शव अपने पास रखते हैं।