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कैप्टन अमरिंदर के मुख्य प्रधान सचिव की नियुक्ति रद, हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 09:37 AM IST
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retired IAS officer Suresh Kumar
- फोटो : File Photo
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पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव पद पर रिटायर आईएएस अधिकारी सुरेश कुमार की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए उनकी नियुक्ति को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विशेष पद सृजित कर सुरेश कुमार को पब्लिक ऑफिस संभालने की जिम्मेदारी दे दी गई। ऐसे में उनकी नियुक्ति को सही करार देने के लिए राज्य सरकार की दलीलें काफी नहीं हैं।
मामले में मोहाली निवासी रमनदीप सिंह ने एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़ के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए सुरेश कुमार की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा 17 मार्च 2017 को रिटायर आईएएस सुरेश कुमार को मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के तौर पर नियुक्ति देना नियमों व प्रावधानों के खिलाफ है। यह एक कैडर का पद है और इस पर केवल एक आईएएस अधिकारी की ही नियुक्ति हो सकती है। इस मामले में नियुक्त होने वाले व्यक्ति आईएएस नहीं बल्कि रिटायर्ड आईएएस है और ऐसे में उसे नियुक्त नहीं किया जा सकता।
याची की दलील थी कि सुरेश कुमार की नियुक्ति ऑल इंडिया सर्विस एक्ट 1951, इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रूल्स 1954 तथा इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रेगुलेशन 1955 के खिलाफ है। इस तरह के पद को सृजित करना केंद्र का कार्य है वह भी संसद के माध्यम से। इसके लिए राज्य से परामर्श लिया जाता है। इस मामले में राज्य सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नियमों को ताक पर रख दिया।
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यदि राज्य सरकार चाहे और उसके पास अधिकार हो तो भी यह पद 5 वर्ष के लिए सृजित नहीं किया जा सकता है। याची ने कहा कि सुरेश कुमार को नियुक्ति देने के साथ ही उन्हें वेतन और सुविधाएं केंद्रीय कैबिनेट सचिव स्तर की दी जा रही हैं। ऐसे में याचिका लंबित रहते सुरेश कुमार को उनके पद की शक्तियों का इस्तेमाल न करने दिया जाए। साथ ही 17 मार्च की उस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाए जिसके तहत सुरेश कुमार को नियुक्त किया गया था।
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मामले में मोहाली निवासी रमनदीप सिंह ने एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़ के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए सुरेश कुमार की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा 17 मार्च 2017 को रिटायर आईएएस सुरेश कुमार को मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के तौर पर नियुक्ति देना नियमों व प्रावधानों के खिलाफ है। यह एक कैडर का पद है और इस पर केवल एक आईएएस अधिकारी की ही नियुक्ति हो सकती है। इस मामले में नियुक्त होने वाले व्यक्ति आईएएस नहीं बल्कि रिटायर्ड आईएएस है और ऐसे में उसे नियुक्त नहीं किया जा सकता।
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याची की दलील थी कि सुरेश कुमार की नियुक्ति ऑल इंडिया सर्विस एक्ट 1951, इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रूल्स 1954 तथा इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रेगुलेशन 1955 के खिलाफ है। इस तरह के पद को सृजित करना केंद्र का कार्य है वह भी संसद के माध्यम से। इसके लिए राज्य से परामर्श लिया जाता है। इस मामले में राज्य सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नियमों को ताक पर रख दिया।
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यदि राज्य सरकार चाहे और उसके पास अधिकार हो तो भी यह पद 5 वर्ष के लिए सृजित नहीं किया जा सकता है। याची ने कहा कि सुरेश कुमार को नियुक्ति देने के साथ ही उन्हें वेतन और सुविधाएं केंद्रीय कैबिनेट सचिव स्तर की दी जा रही हैं। ऐसे में याचिका लंबित रहते सुरेश कुमार को उनके पद की शक्तियों का इस्तेमाल न करने दिया जाए। साथ ही 17 मार्च की उस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाए जिसके तहत सुरेश कुमार को नियुक्त किया गया था।
यह रहे आदेश के मुख्य बिंदु
कोर्ट
- फोटो : amar ujala
यह रहे आदेश के मुख्य बिंदु
1. पंजाब सरकार की दलील थी कि राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह इस प्रकार का पद सृजित कर सके। इस पर हाईकोर्ट का जवाब रहा कि भले ही राज्य के पास शक्तियां हैं लेकिन कानून से ऊपर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। निर्णय लेते हुए संविधान के अनुसार चलना जरूरी है।
2. महज कैबिनेट रैंक और बराबर का वेतन देने से सुरेश कुमार का पद कैबिनेट का नहीं होता। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के जवाब, नियुक्ति के ब्योरे, सुरेश कुमार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पाया कि वे पब्लिक ऑफिस की परिभाषा में आने वाला पद संभाल रहे थे।
सीधा आदेश
सुरेश कुमार पब्लिक ऑफिस संभाल रहे हैं वह भी बिना किसी कानूनी मंजूरी के। यह सीेधे तौर पर संविधान की धारा 166(3) का उल्लंघन है। ऐसे में उनकी नियुक्ति के आदेशों को खारिज किया जाता है।
1. पंजाब सरकार की दलील थी कि राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह इस प्रकार का पद सृजित कर सके। इस पर हाईकोर्ट का जवाब रहा कि भले ही राज्य के पास शक्तियां हैं लेकिन कानून से ऊपर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। निर्णय लेते हुए संविधान के अनुसार चलना जरूरी है।
2. महज कैबिनेट रैंक और बराबर का वेतन देने से सुरेश कुमार का पद कैबिनेट का नहीं होता। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के जवाब, नियुक्ति के ब्योरे, सुरेश कुमार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पाया कि वे पब्लिक ऑफिस की परिभाषा में आने वाला पद संभाल रहे थे।
सीधा आदेश
सुरेश कुमार पब्लिक ऑफिस संभाल रहे हैं वह भी बिना किसी कानूनी मंजूरी के। यह सीेधे तौर पर संविधान की धारा 166(3) का उल्लंघन है। ऐसे में उनकी नियुक्ति के आदेशों को खारिज किया जाता है।