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‘हाथवीर’ में में कुछ यूं झलका बेरोजगार युवाओं का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 02 Feb 2014 09:41 AM IST
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इन हाथों के रहते हुए भी मैं कुछ नहीं कर पाया तो इनके ना रहने का भी कोई गम नहीं। यह डायलॉग थे उस अभिनेता के जो अपने हाथों को काट कर अपनी बेरोजगारी का दुख बयान करता है।
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प्लाजा-17 में हुए नुक्कड़ नाटक ‘हाथवीर’ में बेरोजगारी के दर्द को बयान किया गया। यह नाटक रोजगार अधिकार आंदोलन द्वारा करवाया गया।
नाटक में एक युवक बेरोजगारी के चलते अपने हाथों को काट देता है और फिर अपने उन सपनों को बयान करता है, जो वह अकसर देखता था। नाटक का मकसद ‘राइट टू इंप्लायमेंट’ की आवाज को उठाना है।
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