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हाईकोर्ट ने रद्द किया हरियाणा महिला आयोग भंग करने का फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 18 May 2016 12:47 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo
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हरियाणा सरकार की ओर से राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को उनके पदों से हटाकर आयोग भंग किए जाने के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
मंगलवार को आयोग की अध्यक्ष कमलेश पांचाल और उपाध्यक्ष सुमन दहिया की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। इस फैसले से राज्य महिला आयोग के साथ-साथ उसकी अध्यक्ष कमलेश पांचाल और उपाध्यक्ष सुमन दहिया की भी बहाली हो गई है।
हरियाणा सरकार की ओर से 4 अगस्त, 2015 को आयोग भंग कर दोनों महिला पदाधिकारियों को हटान के खिलाफ कमलेश पांचाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
तब जस्टिस एसके मित्तल जस्टिस और एचएस सिद्धू की बेंच ने सुनवाई के दौरान पहले तो हरियाणा सरकार के फैसले पर तुरंत रोक लगाने से इंकार कर दिया और इन पदों पर नई नियुक्ति करने पर भी रोक लगा दिया।
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पांचाल ने याचिका में कहा था कि उनका कार्यकाल 3 साल या 65 साल की उम्र (जो भी पहले हो) तक है और उनकी नियुक्ति 22 मई, 2014 को की गई थी। ऐसे में कार्यकाल समाप्त हुए बिना उन्हें हटाना गलत है।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि सरकार को यह अधिकार नहीं है कि आयोग की अध्यक्ष के कार्यकाल में कटौती करे। इसलिए उन्हें मनमाने तरीके से हटाया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।
मंगलवार को इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश ग्रोवर ने हरियाणा सरकार के फैसले को रद्द करते हुए आयोग और उसके पदाधिकारियों की बहाली के आदेश दिए।
यह है मामला
हरियाणा महिला आयोग का गठन और उसके पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश की पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। मौजूदा सरकार ने आयोग में नियुक्तियों के दौरान अनियमिताएं बरते जाने का आरोप लगाते हुए पिछले वर्ष चार अगस्त को न सिर्फ दोनों महिला पदाधिकारियों को हटा दिया था, बल्कि आयोग को भी भंग कर दिया था। प्रदेश सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कमलेश पांचाल ने खट्टर सरकार पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए थे। पांचाल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार बनने के बाद से ही उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा सरकार ने उनके वेतन-भत्ते भी रोक लिए थे।
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मंगलवार को आयोग की अध्यक्ष कमलेश पांचाल और उपाध्यक्ष सुमन दहिया की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। इस फैसले से राज्य महिला आयोग के साथ-साथ उसकी अध्यक्ष कमलेश पांचाल और उपाध्यक्ष सुमन दहिया की भी बहाली हो गई है।
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हरियाणा सरकार की ओर से 4 अगस्त, 2015 को आयोग भंग कर दोनों महिला पदाधिकारियों को हटान के खिलाफ कमलेश पांचाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
तब जस्टिस एसके मित्तल जस्टिस और एचएस सिद्धू की बेंच ने सुनवाई के दौरान पहले तो हरियाणा सरकार के फैसले पर तुरंत रोक लगाने से इंकार कर दिया और इन पदों पर नई नियुक्ति करने पर भी रोक लगा दिया।
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पांचाल ने याचिका में कहा था कि उनका कार्यकाल 3 साल या 65 साल की उम्र (जो भी पहले हो) तक है और उनकी नियुक्ति 22 मई, 2014 को की गई थी। ऐसे में कार्यकाल समाप्त हुए बिना उन्हें हटाना गलत है।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि सरकार को यह अधिकार नहीं है कि आयोग की अध्यक्ष के कार्यकाल में कटौती करे। इसलिए उन्हें मनमाने तरीके से हटाया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।
मंगलवार को इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश ग्रोवर ने हरियाणा सरकार के फैसले को रद्द करते हुए आयोग और उसके पदाधिकारियों की बहाली के आदेश दिए।
यह है मामला
हरियाणा महिला आयोग का गठन और उसके पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश की पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। मौजूदा सरकार ने आयोग में नियुक्तियों के दौरान अनियमिताएं बरते जाने का आरोप लगाते हुए पिछले वर्ष चार अगस्त को न सिर्फ दोनों महिला पदाधिकारियों को हटा दिया था, बल्कि आयोग को भी भंग कर दिया था। प्रदेश सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कमलेश पांचाल ने खट्टर सरकार पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए थे। पांचाल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार बनने के बाद से ही उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा सरकार ने उनके वेतन-भत्ते भी रोक लिए थे।