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हरियाणा में कड़ाके की ठंड जारी, आज फिर पड़ेगा पाला, ऐसे करें फसलों का बचाव

Tue, 29 Dec 2020 01:25 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 29 Dec 2020 01:25 AM IST
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Haryana Weather Update: Night Temperature 1.6 degree Celsius at Narnaul of Haryana
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के चलते मैदानी क्षेत्रों में ठंड का प्रकोप जारी है। सोमवार को हरियाणा के नारनौल का रात्रि तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। वहीं, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार हिसार का रात्रि तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। रात के समय पाला भी पड़ा। 

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हालांकि मौसम विभाग के अनुसार हिसार का रात्रि तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, 6.4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं हवाओं ने खूब परेशान किया। मौसम विभाग ने 31 दिसंबर तक प्रदेश में ठंड का ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान शीत लहर, पाला और धुंध की संभावना है।
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आज भी पाला पड़ेगा, तापमान गिरेगा 
एचएयू के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खिचड़ के अनुसार, प्रदेश में उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना से रात्रि तापमान में और गिरावट होगी। कहीं-कहीं पाला पड़ने की भी संभावना है। इस दौरान वातावरण में नमी अधिक होने से अलसुबह धुंध रहेगी। 
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ऐसे जमता है पाला  
सर्द मौसम में जब तापमान हिमांक के आसपास या इससे नीचे चला जाता है, तब वायु में उपस्थित जलवाष्प द्रव रूप में परिवर्तित हुए बिना ही सीधे सूक्ष्म हिमकणों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसे ही पाला पड़ना या बर्फ जमना कहा जाता है। दोपहर बाद हवा के न चलने और रात में आसमान साफ रहने पर पाला पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है। 

प्रदेश में पाला आमतौर पर दिसंबर से फरवरी के महीने में ही पड़ता है। पाले के कारण फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों व नर्सरी पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार तनों, फूलों, फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाते हैं और ये पौधों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं।

पाले से फसलों का ऐसे करें बचाव 
पाले का हानिकारक प्रभाव अगेती सरसों, आलू, फलों व सब्जियों की नर्सरी और छोटे फलदार पौधों पर पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान भाई यदि पानी उपलब्ध हो तो विशेषकर ऊपर लिखित फसलों, सब्जियों व फलदार पौधो में सिंचाई करें, ताकि जमीन का तापमान बढ़ सके। 

खेत के किनारे पर और 15 से 20 फुट की दूरी के अंतराल पर जिस ओर से हवा आ रही है, रात्रि के समय कूड़ा-कचरा, सूखी घास आदि एकत्रित कर धुआं करना चाहिए, ताकि वातावरण का तापमान बढ़ सके और पाले का हानिकारक प्रभाव न पड़े। सीमित क्षेत्र में लगी हुई फल व सब्जियों की नर्सरी को टाट, पॉलीथिन और भूसे से ढकें। 

  • स्थान    अधिकतम    न्यूनतम
  • अंबाला       16.8        5.0
  • भिवानी       20.7       4.5
  • हिसार         18.0       2.7
  • करनाल       17.2       3.6
  • नारनौल      19.8       1.6
  • रोहतक        15.5       3.2
  • सिरसा         16.8       3.2
  • कुरुक्षेत्र        17.0       3.6
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