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बेवजह चालान नहीं काटेगी ट्रैफिक पुलिस और न ही दस्तावेज जांचे जाएंगे, पर माननी होगी एक शर्त

Wed, 10 Jul 2019 12:40 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 10 Jul 2019 12:40 PM IST
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haryana traffic police condition for public regarding driving and traffic rules
फाइल फोटो
हरियाणा में ट्रैफिक पुलिस न बेवजह चालान काटेगी और न ही दस्तावेजों की जांच करेगी, लेकिन तब जब आप एक शर्त मानते हुए उस पर अमल करेंगे। दरअसल, अगर सड़क पर चालक सही तरीके से गाड़ी चला रहे हैं तो न उनका चालान काटा जाएगा और उनके दस्तावेज भी नहीं जांचे जाएंगे। हरियाणा पुलिस ने अब दुर्घटना वाले क्षेत्रों में ही चालान पर ज्यादा फोकस करने का निर्णय लिया है।
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पुलिस महानिदेशक मनोज यादव ने बताया कि एक सर्वेक्षण के अनुसार, राजमार्गों पर 35 प्रतिशत चालान होते हैं, जबकि 65 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं शाम चार बजे से रात 12 बजे के बीच होती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश दुर्घटनाएं विजिबिलिटी वॉयलेशन के कारण होती हैं, इसलिए सभी पीसीआर में साइन बोर्ड की व्यवस्था की जाएगी, जो दुर्घटना स्थल से 150 मीटर पहले रखे जाएंगे। पुलिस की चालानिंग अब रोड सेफ्टी ओरिएंटेड होगी, जिसका उद्देश्य सेफ ड्राइविंग है।
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प्रदेश में ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ सघन अभियान चलाए जाएंगे। पुलिस ने परिवहन निदेशालय को 1952 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है। ये लाइसेंस गलत ड्राइविंग करने वालों के हैं। परिवहन विभाग के एसीएस टीसी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में इस समय सात ट्रॉमा सेंटर हैं, जिन्हें बढ़ाकर 13 किया जाएगा। इस संबंध में तीन एमओयू हो चुके हैं, जिनके तहत निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ट्रॅामा सेंटर की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
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सड़क दुर्घटनाओं में सात प्रतिशत की कमी

परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि 10 वर्षों की तुलना में प्रदेश में पहली बार छह महीने में सड़क दुर्घटनाओं में सात प्रतिशत की कमी आई है, जिसके फलस्वरूप मृत्यु दर में भी 3 प्रतिशत की कमी हुई है। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है, जिसने सड़क दुर्घटनाएं कम करने के उद्देश्य से विजन जीरो लागू किया।

प्रदेश में लगभग 1650 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 1500 से अधिक को दुरुस्त कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के 48 प्रतिशत, लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के 24 प्रतिशत, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के 22 प्रतिशत तथा हरियाणा राज्य विपणन बोर्ड के 24 प्रतिशत ब्लैक स्पॉट से संबंधित मामले लंबित हैं।

राजस्थान, हिमाचल ने किया हरियाणा का अनुसरण
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के अनुसार, हरियाणा उन राज्यों में से एक है जहां सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कानून बनाया गया है। इसके अंतर्गत चालान से मिलने वाली धन राशि का 50 प्रतिशत पैसा सड़क सुरक्षा कोष में जमा करवाया जाता है। हरियाणा का अनुसरण राजस्थान व हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने भी किया है।

पुलिस विभाग ने बीते वर्ष बिना सीट बेल्ट के लगभग 1.66 लाख, बिना हेल्मेट के लगभग 2.60 लाख, ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लगभग 4300 तथा ड्रंक एंड ड्राइव के लगभग 87,000 चालान किए हैं।

34 प्रतिशत दुर्घटनाएं दुपहिया वाहनों की

प्रदेश में लगभग 34 प्रतिशत दुर्घटनाएं दुपहिया वाहनों की होती हैं। इसलिए कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर बच्चों को ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिए जाने पर विचार चल रहा है। निजी कंपनियों के माध्यम से शिक्षण संस्थानों में ड्राइविंग प्रशिक्षण मुहैया कराकर दुर्घटनाओं में कमी लाने की तैयारी है।

हाई पावर परचेज कमेटी के पास बस खरीद का मामला
पंवार ने बताया कि वर्ष 2014 में रोडवेज बसों का बेड़ा 4100 था, जो अब लगभग 3600 का रह गया है। 367 रोडवेज बसें खरीदने की मांग हाई परचेज कमेटी को भेजी गई है। प्रदेश में इस समय प्रतिदिन लगभग 33 लाख लोगों को परिवहन सुविधाओं की जरूरत है, जबकि हम प्रतिदिन लगभग साढ़े 12 लाख लोगों को ही परिवहन सुविधाएं मुहैया करा पा रहे हैं।

किलोमीटर स्कीम शुरू करने का निर्णय लिया था, लेकिन दरों में अंतर आने के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। अब 190 बसों के टेंडर निकाले हैं, जिनके लिए 21 से 22 रुपये का रेट मिला है, निजी ऑपरेटरों को बसें देने को कहा है।
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