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हरियाणा रोडवेज यूनियन की मांग, चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल स्पष्ट करें अपनी नीति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Oct 2019 06:55 AM IST
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ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की ओर से शनिवार को प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियों से उनके घोषणा पत्र में हरियाणा रोडवेज के बारे में अपनी-अपनी नीतियां स्पष्ट करने का आग्रह किया, ताकि रोडवेज कर्मचारी उसके अनुसार अपना रुख स्पष्ट कर सकें। यह घोषणा यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा, महासचिव बलवान सिंह दोदवा और वरिष्ठ उप-प्रधान सुरेश लाठर ने की। 
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साथ ही उन्होंने कहा कि साल 2014 में जब भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली, तो परिवहन विभाग में सरकारी बसों की संख्या 4250 थी, जो आज घटकर 3500 के करीब रह गई है। भाजपा प्रदेश की पहली ऐसी सरकार है जिसके पांच साल के कार्यकाल में एक भी नई बस विभाग में नही आई। प्रदेश की आबादी के अनुसार बसों की संख्या बढ़ने की बजाय लगातार कम हुई है।

प्रदेश सरकार का ध्यान है निजीकरण में

यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा और महासचिव ने कहा कि भाजपा सरकार ने सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाने की बजाय अपना सारा ध्यान निजीकरण पर केंद्रित रखा और कर्मचारी व जनता विरोधी फैसला लेते हुए अपने निजी चहेते बड़े ट्रांसपोर्टरों से सांठगांठ कर गुपचुप तरीके 710 बसें किलोमीटर स्कीम पर हायर कर 510 बसें भारी भरकम कीमतों पर लेने का एग्रीमेंट कर लिया। 

रोडवेज यूनियनों ने किलोमीटर स्कीम में भारी घोटाला होने की आशंका जाहिर करते हुए विरोध स्वरूप राज्यव्यापी हड़ताल की थी, जो लगातार 18 दिन तक चली थी। जिसके कारण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तथा परिवहन विभाग को अरबों रुपये का आर्थिक नुकसान भी हुआ था।

रोडवेज यूनियनों ने किलोमीटर स्कीम में हुए घोटाले की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने की मांग की थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसकी विजिलेंस से जांच करवाई जिसमें भारी घोटाला साबित हुआ। इतना बड़ा घोटाला साबित होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री ने किलोमीटर स्कीम को पूर्ण रूप से रद्द करने की बजाय इसे जारी रखने का ऐलान किया। 

इससे साफ जाहिर होता है कि मौजूदा सरकार अपने निजी चहेतों को सीधा लाभ पहुंचाना चाहती थी। अब सरकार किलोमीटर स्कीम के साथ-साथ अपने निजी चहेते बड़े ट्रांसपोर्टरों को लंबे रूटों पर अस्थाई प्रमिट देने की प्रक्रिया शुरू कर रही है जो प्रदेश की जनता व विभाग के लिए भारी नुकसानदायक है। 

ऐसा करके सरकार जनहित के इस विभाग को बर्बाद करना चाहती है। इससे जहां प्रदेश की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पङ़ेगा वहीं बेरोजगारी को बढ़ावा मिलेगा और विभाग को भारी आर्थिक नुकसान भी होगा। 

इसलिए यूनियन सभी राजनीतिक दलों से मांग करती है कि जनहित से जुड़े परिवहन विभाग को बचाने के लिए अपनी-अपनी नीतियां स्पष्ट करें। यूनियन ने एलान किया है कि जो भी राजनीतिक पार्टी अपने घोषणा पत्र में किलोमीटर स्कीम रद्द करके परिवहन विभाग में सरकारी बसों का बेङा बढ़ाने का मुद्दा शामिल करेगी। रोडवेज कर्मचारी उसी पार्टी को अपना वोट देने पर विचार करेंगे।
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