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हरियाणा के 14025 होमगार्ड्स जवानों का रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा का सपना टूटा, जानिए कैसे

Mon, 02 Mar 2020 10:53 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 02 Mar 2020 10:53 AM IST
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Haryana Roadways Rejects Proposal of Free Travelling Service to Home guards
Haryana Roadways Bus
हरियाणा होमगार्ड्स के 14025 जवानों को परिवहन विभाग ने तगड़ा झटका दिया है। होमगार्ड्स प्रदेश से बाहर रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा नहीं कर पाएंगे। उन्हें पूरा किराया चुकाना होगा। निदेशक परिवहन विभाग ने हरियाणा होमगार्ड्स वेलफेयर एसोसिएशन का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ से बाहर पुलिस जवानों की मुफ्त यात्रा पर विभाग पहले ही रोक लगा चुका है। होमगार्ड्स वेलफेयर एसोसिएशन के समन्वयक संदीप शर्मा ने परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को 31 जनवरी 2020 को ईमेल कर प्रदेश से बाहर फ्री बस सुविधा मांगी थी।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मांग पत्र को निदेशक परिवहन वीरेंद्र दहिया को भेज दिया। उनके जरिए यह मांग पत्र विभाग के मुख्य लेखा अधिकारी के पास पहुंचा। पूरी पड़ताल के बाद यह निर्णय लिया गया कि होमगार्ड्स को रोडवेज में फ्री बस सुविधा प्रदेश से बाहर नहीं दी जा सकती। होमगार्ड्स के 14025 जवानों में से 5200 हर समय डयूटी पर रहते हैं। मुख्य लेखा अधिकारी की रिपोर्ट के बाद निदेशक परिवहन विभाग ने निर्णय से होमगार्ड्स एसोसिएशन के समन्वयक संदीप शर्मा को 26 फरवरी को पत्र भेजकर अवगत करा दिया है। पत्र की कॉपी डीजी जेल को भी भेजी गई है।
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चूंकि, पुलिस कर्मियों के तीन राज्यों से बाहर जाने पर रोडवेज बसों में किराया देने का प्रावधान लागू हो चुका है। अब विभाग ने डीजी जेल को भी जानकारी दे दी है कि उनके कर्मियों को भी फ्री बस सुविधा हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में ही मिलेगी। हरियाणा के समालखा से कांग्रेस विधायक धर्मपाल छोक्कर पुलिस कर्मियों को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा की मांग विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कर चुके हैं। शून्यकाल के दौरान उन्होंने यह मामला उठाया था। जिसमें उन्होंने कहा कि 2011 में परिवहन विभाग ने पुलिस कर्मियों की मुफ्त बस सुविधा तीन राज्यों को छोड़कर खत्म कर दी थी।
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जिसे 2015 में बहाल कर दिया गया। लेकिन बीते वर्ष विभाग ने 2015 के पत्र का हवाला न देते हुए 2011 के आदेश फिर से लागू कर दिए। सरकार इस पर पुनर्विचार करे। अभी तक सरकार की ओर से सदन में इस पर जवाब नहीं दिया गया है।
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