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सिरसा: राम रहीम को दोषी करार देने के बाद भड़की थी हिंसा, 125 आरोपियों से हटी देशद्रोह की धारा

Sat, 01 Feb 2020 10:29 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरसा ( हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरसा ( हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 01 Feb 2020 10:29 PM IST
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Sedition Charges against 125 accused Dropped In Sirsa violence case
पंचकूला हिंसा के दौरान की पुरानी तस्वीर। - फोटो : फाइल फोटो

25 अगस्त 2017 को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म मामले में कोर्ट से दोषी करार देने के बाद हुई हिंसा में 125 आरोपियों से देशद्रोह और जानलेवा हमले की धारा को कोर्ट ने हटा दिया है। शनिवार को चार्ज फ्रेम को लेकर हुई बहस के दौरान अतिरिक्त सेशन जज की अदालत ने यह फैसला सुनाया। 

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सिटी थाने में इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं। एक एफआईआर 695 में करीब 85 डेरा प्रेमियों को आरोपी बनाया गया था। यह हिंसा जगदंबे पेपर मिल के पास हुई थी। दूसरी एफआईआर नंबर 696 में करीब 40 डेरा प्रेमी आरोपी थे, जिस पर मिल्क प्लांट को आग लगाने का मामला दर्ज किया गया था। देशद्रोह की धारा 124ए हटाने के संबंध में न्यायालय का कहना है कि इस बारे में गृह मंत्रालय से मंजूरी नहीं ली गई। 
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धारा 307 हटाने के संबंध में कोर्ट का कहना है कि भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और गोली चलाई, लेकिन चिकित्सक अधिकारी की रिपोर्ट में फायर आर्म्स के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं की। आरोपियों ने पुलिस कर्मचारियों पर हमला किया, लेकिन तथ्यों में हमला जानलेवा दिखाई नहीं देता, इसलिए कोर्ट की नजर में यह मामला धारा 307 का नहीं बनता। डेरा प्रेमियों के केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट संदीप शर्मा, अभिनव शर्मा व परमिंदर गाबा का कहना है कि कोर्ट ने देशद्रोह व जानलेवा हमला करने की धाराएं हटा दी हैं, क्योंकि पुलिस इनसे संबंधित कोई ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाई।

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बता दें कि 25 अगस्त 2017 को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इस फैसले के बाद पंचकूला के बाद सिरसा में भी हिंसा हुई थी। शहर में धारा 144 लागू थी। डेरा प्रेमियों ने मिल्क प्लांट व बेगू बिजली घर को आग लगा दी थी। इसके बाद जगदंबे पेपर मिल के पास हिंसा हुई थी। जब डेरा प्रेमी शहर की ओर बढ़ रहे थे तो पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें 6 डेरा प्रेमी मारे गए थे। 

कीर्तिनगर चौकी प्रभारी शैलेंद्र कुमार की शिकायत पर डेरा प्रेमियों के खिलाफ धारा 188, 147, 148,149, 307, 124ए, 435, 332, 353, 186, 120बी, 109 आईपीसी, आर्म्स एक्ट 25, 54, 59 के तहत मामला दर्ज किया गया था। सरकारी पक्ष ने अभियुक्तों को चार्ज फ्रेम की बहस के दौरान चार्जशीट करने का अनुरोध किया था। पुलिस ने मामले में 900 पेजों का चालान पेश किया था। इसमें 69 लोगों को गवाह बनाया गया था। 6 नवंबर 2017 से आरोपियों पर कोर्ट में आरोप तय होने शुरू हुए थे। अधिकतर आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

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