हरियाणा में धान की खरीद आज से शुरू, कपास के लिए केंद्र से मांगी मदद
- धान खरीद के लिए 198 मंडियां व खरीद केंद्र तैयार, पहले ही मंडियों में धान लेकर पहुंचे किसान
- कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी से मिले सीएम व डिप्टी सीएम, कपास खरीद में मदद की गुहार
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हरियाणा में आज से प्रदेश की 198 मंडियों व खरीद केंद्रों में धान की खरीद शुरू हो जाएगी। जबकि कपास की खरीद में मदद के लिए प्रदेश सरकार ने दिल्ली पहुंचकर केंद्र से मदद मांगी है। जबकि प्रदेश सरकार ने मूंग की खरीद करने की भी घोषणा कर दी है।
शनिवार देर शाम को सीएम मनोहर लाल और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में कपास के उत्पादन और खेतीबाड़ी का विस्तृत ब्योरा उन्हें बताया। सीएम ने बताया कि प्रदेश में वर्ष भर करीब 1 करोड़ क्विंटल कपास का उत्पादन होता है।
प्रदेश में कपास की बड़े स्तर पर खेती भी आठ ही जिलों में होती है। इसलिए केंद्र से मांग है कि इस बार सरकार प्रदेश के किसानों से कपास की खरीद कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के माध्यम से करे। बताते चलें कि प्रदेश में सीसीआई के 40 परचेज सेंटर हैं। जिसके जरिए किसानों से कपास खरीदा जा सकता है।
सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि सीसीआई भी प्रदेश के आढ़तियों के माध्यम से खरीद करे। ताकि उन्हें भी प्रति क्विंटल मिलने वाला कमीशन और हैंडलिंग चार्ज भी मिल सके। प्रदेश सरकार की अपील पर कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने हर संभव सहयोग और मदद का आश्वासन दिया है।
केंद्र खरीदेगा हरियाणा से मूंग की दाल
केंद्र सरकार ने खरीफ 2020-21 सीजन में हरियाणा में मूंग की अधिकतम 5,825 मीट्रिक टन की खरीद के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) को लागू करने की मंजूरी दे दी है। खरीद अवधि 90 दिनों की होगी, जो 1 अक्टूबर, 2020 से शुरू होगी। खरीद शुरू करने से पहले, केंद्रीय नोडल एजेंसी पीएसएस दिशा निर्देशों के अनुसार हरियाणा सरकार द्वारा खरीद केंद्रों से सामान्य सीमा के भीतर किए गए वैज्ञानिक भंडारण की उपलब्धता को सत्यापित करेगी।
इसके अलावा, खरीद केवल वैज्ञानिक भंडारण की उपलब्धता की पुष्टि तक सीमित होगी। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय नोडल एजेंसी पीएसएस दिशा निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार पहले से खरीद स्टॉक को डिस्पॉस करेगी। साथ ही, केंद्रीय नोडल एजेंसी पंजीकृत किसानों से मूंग की केवल एफएक्यू की खरीद और उसका उचित भंडारण सुनिश्चित करेगी।
राज्य सरकार स्वीकृत मात्रा की खरीद लागत का कम से कम 15 प्रतिशत के बराबर रिवॉल्विंग फंड प्रदान करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि जिन किसानों से खरीद की गई है उनका भुगतान तीन दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए। हालांकि, ऐसे रिवॉल्विंग फंड प्रदान करने की लागत की प्रति पूर्ति पीएसएस दिशा निर्देशों के अनुसार होगी।