मंत्री अनिल विज की नाराजगी से गिरी गाज, अंबाला सिविल सर्जन डॉक्टर गोबिंद राम सस्पेंड
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सिविल सर्जन डॉक्टर गोबिंद राम को सस्पेंड कर दिया है। बुधवार शाम करीब 4 बजे ईमेल के जरिए उन्हें इस बात की सूचना दी गई। ईमेल पढ़ते ही डॉक्टर गोबिंद राम सन्न रह गए। इसके बाद कुछ पल तो उन्होंने किसी से बात नहीं की लेकिन फिर शाम करीब 5 बजे अपने कार्यालय के सभी अधिकारियों को बुलाया। उनके साथ बातचीत की। कहा कि यदि उनसे कोई भी अपने कार्यकाल के दौरान भूल या गलती हुई है तो क्षमा करें। यह कहने के बाद वह पंचकूला रवाना हो गए।
भेजी गई ईमेल में उनकी सस्पेंशन का कोई कारण नहीं बताया गया। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर गोबिंद राम गुप्ता काफी समय से हेडक्वार्टर अंबाला को मेंटेन नहीं कर पा रहे थे। अपनी ज्वाइनिंग से लेकर अभी तक वह ज्यादातर छुट्टी पर ही चल रहे थे। करीब 3-4 महीने पहले ही उनकी अंबाला में ज्वाइनिंग हुई थी। बताया जा रहा है कि बार-बार छुट्टियों पर चले जाने और हेडक्वार्टर मेंटेन नहीं कर पाने के कारण मंत्री विज उनसे खफा चल रहे थे। सस्पेंशन तक उनका हेडक्वार्टर पंचकूला रहेगा वह वहीं रिपोर्टिंग करेंगे।
207 कर्मचारियों को 4 माह से वेतन का इंतजार
बताया जा रहा है कि आउट सोर्सिंग पर 207 कर्मचारी सिविल अस्पताल में लगे हैं। इन कर्मचारियों को 4 माह से वेतन नहीं दिया गया। सीएमओ ने अपने पद पर रहते हुए इनके वेतन के बजट के लिए कभी डिमांड ही नहीं भेजी। इसी से खफा विज ने उन्हें सस्पेंड करने के आदेश डीजी हेल्थ को दिए। वेतन को लेकर गुस्साए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ दो दिन पहले नारेबाजी भी की थी। पीएमओ से मिलने गए कर्मचारियों को यही कहा गया था कि बजट ही पास नहीं हुआ। इसे भी उनकी सस्पेंशन का एक कारण बताया जा रहा है।
सस्पेंड होने वाले पहले सीएमओ
अंबाला के इतिहास की बात करें तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पहले प्लान की बात रही हो या फिर कांग्रेस शासनकाल की 1985 से वर्तमान समय तक किसी भी सीएमओ को अंबाला में सस्पेंड नहीं किया गया। ऐसे में हर कोई यह जानना चाह रहा है कि आखिर वह क्या कारण रहे कि डीजी हेल्थ को डॉक्टर गोबिंद राम को सस्पेंड करने के आर्डर जारी करने पड़े।
5 दिन पहले मोंगा अस्पताल से करवाया था पथरी का ऑपरेशन
डॉ. गोबिंद राम गुप्ता ने करीब 5 दिन पहले ही अंबाला शहर स्थित मोंगा अस्पताल से पथरी का ऑपरेशन भी करवाया था। इसके बाद एक दो दिन वह रेस्ट पर रहे लेकिन अब काम पर आए थे। ऐसे में उनकी अचानक सस्पेंशन से सभी सकते में थे।
वीआरएस के लिए कर चुके थे आवेदन
डॉ. गोबिंद राम गुप्ता स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए भी आवेदन कर चुके थे। माना जा रहा था कि एक माह के भीतर उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मिलने वाली थी। लेकिन इसी वीआरएस मिलने से पहले ही उन पर यह कार्रवाई हो गई।