फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   haryana needs own highcourt for state

अलग हाईकोर्ट चाहता है ये प्रदेश, विधानसभा में संकल्प-पत्र पारित किया गया

Fri, 05 May 2017 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 May 2017 09:46 AM IST
विज्ञापन
haryana needs own highcourt for state
हरियाणा विधानसभा में संकल्प-पत्र पारित - फोटो : अमर उजाला
अब तक राज्यों के हक का विवाद तो आपने कई बार देखा और सुना होगा, लेकिन इस बार मुद्दा हाईकोर्ट का है, जो अपने आप में शायद पहली ही बार होगा कि किसी प्रदेश ने अलग हाईकोर्ट के लिए कवायद शुरु की है। हरियाणा की खट्टर सरकार ने अलग हाईकोर्ट केलिए मजबूती से कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए वीरवार को विधानसभा के विशेष सत्र में सर्व सम्मति से सरकारी संकल्प पारित किया गया। सीएम मनोहर लाल खट्टर की बीते 23 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात में मिले सकारात्मक संकेतों के बाद यह कदम उठाया है। 
विज्ञापन


सरकारी संकल्प में अलग हाईकोर्ट के लिए संसद से पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 में समुचित संशोधन कर आवश्यक कानून बनाने का आग्रह किया गया है। संसदीय कार्य मंत्री रामबिलास शर्मा ने सरकारी संकल्प को सदन पेश किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 में प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य के लिए पृथक उच्च न्यायालय होगा।
विज्ञापन


हरियाणा के सिवाय सभी नए बनाए गए राज्यों झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में अलग हाईकोर्ट हैं। हरियाणा के अस्तित्व में आने के 50 साल बाद भी अलग हाईकोर्ट नहीं बन पाया है। इसके कारण कार्य की अधिकता से मुकद्दमों के लंबित रहने समेत अनेक दिक्कतें सामने आ रही हैं। वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायधीशों के 85 पद स्वीकृत हैं, जिनमें हरियाणा से मात्र 18 न्यायाधीश हैं। इसी तरह अधिवक्ताओं से सीधे न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए हरियाणा से 23 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके तहत हरियाणा के 13 न्यायाधीश ही नियुक्त हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

विधानसभा और सचिवालय की तर्ज पर विभाजन

haryana needs own highcourt for state
हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
सरकार ने हाईकोर्ट की मौजूदा बिल्डिंग का ही बंटवारा कर अलग से हाईकोर्ट बनाने की मांग केंद्र सरकार से की है। साथ ही वर्तमान भवन में ही अलग हाईकोर्ट बनाने का सुझाव विधानसभा व सचिवालय के बंटवारे की तर्ज पर दिया गया है। 

अलग हाईकोर्ट में चंडीगढ़ अड़चन :
हरियाणा की अलग हाईकोर्ट में चंडीगढ़ मुख्य अड़चन है। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने सदन में कहा कि हरियाणा का अलग हाईकोर्ट बनने के बाद यह तय कर पाना मुश्किल है कि चंडीगढ़ किसके अधीन रहेगा। जवाब में सीएम ने कहा, यह तकनीकी दिक्कत सामने आ रही है।

इसके लिए दो सुझाव केंद्र सरकार को दिए गए हैं। पहला यह कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के एक-एक जज की अलग से बैंच बना दी जाए। यह बैंच केवल चंडीगढ़ से जुड़े मामलों की ही सुनवाई करे। हुड्डा ने यह सुझाव भी दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट की एक बैंच चंडीगढ़ में स्थापित करें, जो यूटी से जुड़े मामलों की सुनवाई करे। 

चंडीगढ़ पर नहीं छोड़ेंगे दावा :
कांग्रेस विधायक करण दलाल ने सुझाव दिया कि प्रदेश की राजधानी अलग से बनाई जाए। हुड्डा ने उनके इस सुझाव को खारिज कर दिया और कहा कि वे चंडीगढ़ पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed