Farm laws: तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद जानिए हरियाणा के किस नेता ने क्या कहा
तीन कृषि कानूनों के विरोध व अन्य मांगों को लेकर किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लंबे संघर्ष के बाद तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। जिसके बाद सरकार व विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया आना भी स्वभाविक था। विपक्ष के नेताओं ने सरकार से किसानों पर दर्ज केस वापस लेने और एमएसपी की गारंटी का कानून लाने की मांग की।
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीन कृषि कानून वापस लेने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे किसानों की जीत करार दिया। हुड्डा ने आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को अब किसान के बाकी बचे अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करनी चाहिए। साथ ही कृषि को लाभकारी बनाने की योजनाएं बनाई जाएं। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे किसानों के घाटे को कम किया जाए और उन्हें लाभ मिले। आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों की मदद के लिए सरकार आगे आए। जिस तरह पंजाब सरकार ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी है। उसी तर्ज पर हरियाणा सरकार को भी ऐलान करना चाहिए।
आंदोलन खत्म कर अब घरों को लौटें किसान : मनोहर लाल
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन कृषि कानून वापस लेने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से आग्रह है, वे अब आंदोलन को खत्म कर घरों को लौटें। उन्हें अपना धरना तुरंत खत्म करना चाहिए। आंदोलन से आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब इस मुद्दे के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए।
एमएसपी पर कानून बनना बेहद जरूरी : अभय
इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने कृषि कानूनों की वापस को किसानों की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर कानून बेहद जरूरी है। अगर एमएसपी पर कानून नहीं बना, तो बड़े उद्योगपति मनमर्जी करेंगे। देश में जब सभी चीजों का रेट तय है तो किसानों की फसल का रेट भी तय होना चाहिए। हर साल महंगाई को देखते हुए किसान की फसल का रेट बढ़ाया जाए। सरकार किसान निधि कोष बनाए। किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा देकर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दें। किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत प्रभाव से वापस लिए जाएं। ये सभी मांगें वह विधानसभा में भी रखेंगे।
गैर घातक गतिविधि के केस वापस हों : दुष्यंत
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि नए कृषि कानूनों को वापस लेना सराहनीय है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया। दुष्यंत ने कहा कि किसानों के लंबे संघर्ष को देखते हुए पावन पर्व पर पीएम ने निर्णय लिया। केंद्र सरकार से उम्मीद है कि कृषि की समस्याओं को दूर कर बेहतरी के लिए कदम उठाए जाएंगे। आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस करवाने का प्रयास रहेगा। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब में किसानों पर दर्ज गैर घातक गतिविधि के मामले वापस होने चाहिए। किसानों से माफी मांगना प्रधानमंत्री का बड़प्पन है।
केंद्र सरकार ने किसानों पर थोपे थे नए कानून : सैलजा
नए कृषि कानून वापस लेने पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा का असली चेहरा बार-बार देख चुके हैं। ये सरकार पहले मुद्दे बनाती है, और जब लोग बिल्कुल तंग हो जाते हैं तो उन चीजों को बदल देती है। भाजपा ने कृषि कानून, किसानों व देश के ऊपर थोपे थे। अब जब चुनाव का दौर नजदीक आ गया तो भाजपा ने कानून वापस करने का फैसला ले लिया। यह अन्नदाता और मजदूरों की जीत है। किसानों ने 700 से अधिक अपने भाइयों की जान जाने के बावजूद शांति और संयम का रास्ता नहीं छोड़ा।
कृषि कानूनों की वापसी आंदोलन, लोकतंत्र की जीत : सकसं
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन व लोकतंत्र की जीत है। किसानों की जीत से श्रम कानूनों को रद्द कर पूंजीपतियों के हकों में बनाए गए चार लेबर कोड्स, नेशनल मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना, पुरानी पेंशन बहाली, ठेका प्रथा समाप्त कर कच्चे कर्मियों को पक्का करने आदि मांगों को लेकर चल रहे कर्मचारियों एवं मजदूरों के आंदोलन को बल मिलेगा। प्रधानमंत्री को एमएसपी को कानूनी गारंटी व बिजली संशोधन बिल 2021 को वापस लेने की घोषणा भी करनी चाहिए थी। -
कृषि कानून वापसी किसानों के संघर्ष की जीत : बजरंग
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कृषि कानूनों की वापसी को किसानों के संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया। केंद्र सरकार से मांग है कि आंदोलन में जान गंवा चुके किसान परिवाराें को उचित मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। किसान की हर फसल मंडी में आढ़तियों के माध्यम से एमएसपी रेट पर खरीदी जाए। पेट्रोल व डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करें।