मोदी के मंत्री बन रहे जाटों के रहनुमा... आखिर क्यों?
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जब से सुप्रीम कोर्ट ने जाटों का आरक्षण रद्द किया है, पीएम मोदी के मंत्री हरियाणा के जाटों का रहनुमा बनने की फिराक में हैं। आखिर क्या माजरा है? सुप्रीम कोर्ट का जाट आरक्षण पर फैसला आते ही हरियाणा के तीन जाट नेताओं ने ताल ठोक दी है।
बांगर के नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह, हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ इस मामले में लगातार खुद को आगे रखने की कोशिश में हैं।
भले ही यह नेता मीडिया में अपने आप को किसान नेता होने के दावे कर रहे हों, लेकिन इसके पीछे वजह कुछ और ही नजर आ रही है। खास बात है कि हरियाणा में अधिकतर किसान जाट वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
वैसे तो इस राजनीति में सबसे पहले सक्रिय होने वालों में ओम प्रकाश धनखड़ हैं। गुड़गांव में आयोजित एग्री सम्मिट की कमान धनखड़ ने संभाली। इस मेले में किसानों का जमावड़ा लगा। धनखड़ ने चंडीगढ़ में खुद दावा किया था कि लाखों किसान मेले में पहुंचे थे।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की ओर से चलाए गए आंदोलन में भी ओम प्रकाश धनखड़ ने किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता की। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने जाट आरक्षण पर अपना फैसला सुना दिया।
आरक्षण का मुद्दा भुनाकर जाट लीडरशिप बनाने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही बीरेंद्र सिंह ने बयान दिया कि फैसला आने के बाद मैं ठीक से सो नहीं सका। उधर, जाट आरक्षण को लेकर पहला प्रतिनिधिमंडल कैप्टन अभिमन्यु और ओम प्रकाश धनखड़ के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिला।
इस दौरान बीरेंद्र सिंह थोड़ा देरी से पहुंचे थे, लेकिन दूसरी मीटिंग शाह और मोदी के साथ बीरेंद्र सिंह की अगुवाई में हुई। दीन बंधु सर छोटूराम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह को भाजपा में शामिल करने के पीछे भी मंशा यही थी कि एक कद्दावर नेता भाजपा को मजबूती दे।
हालांकि हरियाणा में भाजपा के सत्ता संभालने से पहले पार्टी की ओर से कई बार जाट नेताओं को आगे लाने की कोशिश की गई, लेकिन सूबे में जाट लीडरशिप स्थापित करने में अब तक भाजपा नाकाम रही है। अब देखना यह है कि आरक्षण के मुद्दे पर हरियाणा में जाट राजनीति का ऊंट आखिर किस करवट बैठता है?
मामले में अचानक सक्रिय हुए राव इंद्रजीत
लंबे अरसे बाद केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह अचानक फिर से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। चंडीगढ़ में पिछले दिनों मीडिया से मुखातिब होते हुए राव इंद्रजीत ने कहा था कि वे यहां मीडिया से काफी अरसे बाद मिले हैं।
गौर करने का विषय है कि बिरेंद्र सिंह भी इस मामले में अचानक सक्रिय हुए हैं। अदालत के आदेश के तत्काल बाद ही उन्होंने चंडीगढ़ का रुख किया।
केंद्र और हरियाणा में बैलेंस करके चले राजनीतिक दल
हरियाणा में जब भजनलाल मुख्यमंत्री थे, तब बंसीलाल केंद्र सरकार में मंत्री रहे। इस बार हरियाणा में नान जाट सीएम बनने पर भाजपा ने केंद्र में बीरेंद्र सिंह को मंत्री बनाकर सामंजस्य स्थापित किया है।
हालांकि जाट समुदाय से कैप्टन अभिमन्यु और ओम प्रकाश धनखड़ मनोहर लाल केबिनेट में मंत्री हैं, लेकिन बीरेंद्र सिंह को केंद्र में मंत्री बनाकर सरकार ने एक तीर से कई निशाना साधने का काम किया।