मुरथल गैंगरेपः साहब! दंगा होया सै, जबरदस्ती हुई ईसा ना सुणा
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‘साहब! दंगा होया सै, जबरदस्ती हुई ईसा ना सुणा। ये कहना है हसनपुर वासी सुरेंद्र का, जिनसे सुखदेव ढाबे वाले ने मदद की गुहार लगाई थी।
सुरेंद्र ने बताया कि सुखदेव ढाबे वाले का फोन आया था उस रात। कहा था उपद्रवियों की भीड़ दंगा कर रही है। मेरे ढाबे को भी जला देंगे। उसके साथ उठना-बैठना है। हर सुख-दुख में शरीक होता है तो गांव वाले उसकी मदद को गए थे।
गांव में ओछी हकरत करने वाला कोई नहीं है...लेकिन मीडिया और पुलिस की गाड़ियों की आवक ने जो शक पैदा किया है वो...बहुत बुरा हो रहा है। जो भी हुआ हो जांच होनी चाहिए...कोई गुनहगार है तो उसे कड़ी सजा मिले। हमारे बीच में से ही कोई है तो हम उसे हाजिर कर देंगे...पर किसी की तरफ कोई अंगुली तो उठे?’
मुरथल हाइवे पर छा गई है अजीब सी खामोशी
सुबह के करीब 11.30 बजे का समय। हसनपुर गांव को जाने वाली सड़क पर इक्का-दुक्का लोग आते-जाते नजर आ रहे हैं, उनके चेहरे पर अजीब सी खामोशी है। मीडिया की गाड़ियां देखते ही चौकन्ने हो जाते हैं।
इस संवाददाता के गांव में पहुंचा तो कुछ युवक गाड़ी देखकर दूर से ही किनारे हो गए। 80 वर्षीय ताई को राम-राम कह थोड़ा अपनत्व दिखाया तो सिर पर हाथ फेर बोली जींवदा रह बेटा। उनसे कई सवाल करने थे तो शुरुआत सेहत के बारे में पूछ कर ही कर ली।
यह पूछने पर कि दो-तीन दिन से क्या बात सुन रहे हैं, वृद्धा बोलीं- ‘बेटा कुछ ना होया।’ सुना है, सोमवार की रात कुछ छोरे महिलाओं को उठाकर ले गए थे? इस सवाल का वह कुछ जवाब नहीं देती हैं। फिर कहती हैं, ‘मार कुटाई को बोहत हुई थी। ऐ करण आला कौण थे इसका ना पता...।’
गांव के हर घर में दहशत और चर्चाओं का दौर है
एनएच वन से करीब 500 मीटर अंदर बसे अक्सर शांत रहने वाले इस गांव में पिछले तीन दिन से पुलिस महकमे और मीडिया की गाड़ियां धूल उड़ा रही हैं। इसके चलते गांव के हर घर में अजीब भी दहशत के बीच सहमी हुई चर्चाओं का दौर चल रहा है। गांव में दुकान और चौराहों पर बैठे लोगों से सवाल पर सवाल किए जा रहे हैं। लेकिन, ढेरों सवाल उनके जहन में भी हैं?
आखिर कौन बदनामी का दाग दे गया। सच्चाई तो न जाने कब सामने आएगी...इधर-उधर की बातों ने गांव वालों को शक के घेरे में ला दिया है। यहां के छोरे तो ऐसा नहीं कर सकते? किस-किस को जवाब दें। तभी ठीकठाक कद काठी वाला एक युवक वहां से गुजरता है।
अपना नाम साहिल बताया और कहा, ‘भाई साहब जाम लगाया था, गांव वाले रात 12 बजे तक जाम खोलकर घर लौट आए थे, लेकिन जो कुछ हुआ वो बाद में हुआ। महिलाओं को उठाकर ले जाने की बात तो नहीं सुनी। इस गांव का कोई ऐसा करता तो अब तक पता चल जाता’...इतना कहते हुए वह अपनी राह पकड़ लेता है।