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निकिता तोमर हत्याकांड : अदालत के फैसले पर अनिल विज की प्रतिक्रिया- कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

Wed, 24 Mar 2021 09:16 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 24 Mar 2021 09:16 PM IST
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Haryana Home Minister Anil Vij react on verdict of Nikita Tomar Murder Case
अनिल विज, निकिता तोमर। - फोटो : फाइल

हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने फरीदाबाद के निकिता तोमर हत्याकांड में फैसला आने पर कहा कि प्रदेश में कानून अपने हाथ में लेने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने निकिता मामले की त्वरित जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था, जिसने 24 घंटे में मुजरिमों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। 

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विज ने कहा कि इतना ही नहीं मात्र 11 दिन में 700 पेज का चालान कोर्ट में पेश कर एसआईटी ने नई मिसाल कायम की। पुलिस की इसी कार्रवाई का परिणाम है कि मामले का फैसला पांच महीने पूरे होने से दो दिन पहले ही आ गया। उन्होंने कहा कि परिवार वालों को हमने विश्वास दिलाया था कि उनको शीघ्र न्याय दिलाया जाएगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले से लोगों का न्यायिक प्रणाली पर और विश्वास बढ़ेगा। 
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बता दें कि निकिता तोमर हत्याकांड में फास्ट ट्रेक कोर्ट ने बुधवार को तौसीफ और रेहान को दोषी करार दे दिया। न्यायाधीश सरताज बसवाना ने दोनों को हत्या, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र सहित कई धाराओ में दोषी मानते हुए सजा के लिए शुक्रवार का दिन तय किया है। कोर्ट ने हत्या में इस्तेमाल हथियार उपलब्ध कराने वाले अजहरुद्दीन को बरी कर दिया है। 
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तौसीफ ने 26 अक्टूबर को बी.कॉम फाइनल ईयर की छात्रा सोहना निवासी निकिता तोमर की अग्रवाल कॉलेज के बाहर गोली मारकर उस समय हत्या कर दी थी, जब वह परीक्षा देकर शाम करीब पौने चार बजे कॉलेज से बाहर निकल रही थी। तौसीफ उससे शादी करने का दबाव बना रहा था। निकिता का कार सवार तौसीफ और रेहान ने अपहरण करने की कोशिश की। 


जब निकिता ने विरोध जताया तो तौसीफ ने उसकी हत्या कर दी। इसके बाद दोनों फरार हो गए हैं। घटना के वीडियो ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सकार ने इसमें विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित कर जांच सौंपी। पुलिस ने छह नवंबर को अदालत के सामने हत्या के दो हफ्ते से भी कम समय में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद फास्ट ट्रेक कोर्ट में लगातार तीन महीने 22 दिन तक सुनवाई चली। 

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