हरियाणा: गृहमंत्री अनिल विज बोले- अधिकारी बंद करें गंदा खेल, मैं और सीएम अच्छे दोस्त
कुछ समय पहले प्रदेश के डीजीपी मनोज यादव को सेवा विस्तार देने को लेकर विज और मनोहर लाल के बीच विवाद छिड़ गया था। डीजीपी इस साल की शुरुआत में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में लौटने वाले थे लेकिन सीएम के आदेश वे पद पर बने रहे।
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हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने उनके और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच आने वाले अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया में ऐसे अधिकारियों को न बख्शने की चेतावनी दी है। विज की चेतावनी के बाद हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी में अफरा-तफरी का माहौल है। मंत्री और विधायक इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, जबकि अंदरखाते अफसरशाही से तंग विधायक और मंत्री इस कदम को सही ठहरा रहे हैं।
अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए विज की ओर से फेंका गया यह पासा सत्ता के गलियारे में चर्चा का विषय है। विज ने बुधवार सुबह ही यह संदेश वायरल कर दिया। जिसमें कहा गया है कि कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए मेरे विभागीय कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। उनके दिमाग में यह फितूर भरा है कि मैं और मुख्यमंत्री एक दूसरे के खिलाफ हैं। ऐसे अधिकारियों को बहुत बड़ी गलत फहमी है। जबकि मैं और माननीय मुख्यमंत्री बहुत अच्छे मित्र हैं, जो अधिकारी यह गंदा खेल-खेल रहे हैं, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
हालांकि विज ने इस मामले में किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया है लेकिन गृह सचिव राजीव अरोड़ा और गृह मंत्री अनिल विज के बीच का विवाद किसी से छिपा नहीं है। विज मुख्य सचिव विजय वर्धन और गृह सचिव राजीव अरोड़ा को पत्र लिखकर पूछ चुके हैं कि कोविड के दौरान गठित टास्क फोर्स की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। विभाग के मंत्री होने के नाते उन्हें यह पता होना चाहिए था कि विभाग में क्या चल रहा है।
राजीव अरोड़ा से तनातनी
गृह विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों राजीव अरोड़ा के पास है। विज ने इस बात का मुददा बना दिया है कि दोनों विभागों का काम एक अधिकारी नहीं संभाल सकता। काम प्रभावित हो रहा है, गृह विभाग में हजारों अपील लंबित पड़ी हैं। जनता के सामने जवाबदेही मंत्री की होती है।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता की रिपोर्ट का मुद्दा भी केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा और बताया कि कोविड के दौरान ज्ञान चंद गुप्ता ने अस्पतालों की पैसा वसूली की शिकायत की। मामले की जांच हुई लेकिन रिपोर्ट मंत्री के पास नहीं पहुंची। इस मामले में कमेटी भी गठित हो चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
टास्क फोर्स के मामले में विज ने जताई थी नाराजगी
मालूम हो कि टास्क फोर्स के मामले में विज राजीव अरोड़ा को व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने व्हाट्सएप पर अरोड़ा को संदेश भेजा था कि टास्क फोर्स की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। जिसके जवाब में अरोड़ा ने उन्हें संदेश दिया कि मेरी ऐसी मंशा नहीं थी लेकिन आगे से मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।