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वूमेन्स डे पर जारी कर दिया महिला विरोधी ऐसा सरकारी फरमान, हक्केबक्के रहे गए सब

Sat, 10 Mar 2018 03:35 PM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Sat, 10 Mar 2018 03:35 PM IST
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haryana health department released circular against lady staff on women's day
nurse - फोटो : सांकेतिक चित्र
इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर विभाग ने एक ऐसा महिला विरोधी सरकारी फरमान जारी कर डाला, जिसे पढ़कर हर कोई हक्का बक्का रह गया। मामला हरियाणा का है। नए नियम के अनुसार ज्यादा छुट्टियां लेने वाले डॉक्टरों का प्रमोशन देरी से होगा, क्योंकि अवकाश का समय उनके अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। इससे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होना अब आसान नहीं रहेगा।
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यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग के इस तुगलकी फरमान की वजह से प्रमोट हो चुके डॉक्टरों को रिवर्ट कर दिया जाएगा। वहीं, नये नियम से महिला डॉक्टर अधिक प्रभावित होंगी। उधर, पीजीआईएमएस में डॉक्टरों की शुक्रवार देर रात मीटिंग हुई और प्रशासन के फैसले के विरोध में 15 मार्च को दोपहर एक बजे आपातकालीन बैठक बुलाई है। नए नियम से पीजीआईएमएस में ही प्रभावित होंगे 200 से अधिक डॉक्टर।
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स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जिन डॉक्टरों ने चाइल्ड केयर लीव, मैटरनिटी लीव, अबॉर्शन लीव, अर्नड लीव, स्टडी लीव, एक्ट्रा ऑर्डिनरी लीव, मेडिकल लीव, हॉफ पे लीव (कैजुअल लीव, रिस्ट्रिक्टेड होली डे, अकेडमिक लीव, विंटर व समर वेकेशन को छोड़कर) का समय अनुभव में काउंट नहीं होगा। इन छुट्टियों का समय असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के चार साल के अनुभवों में नहीं जोड़ा जाएगा।
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नियम भविष्य में प्रमोशन पॉलिसी में लागू होगा

haryana health department released circular against lady staff on women's day
doctor
यह नियम भविष्य में प्रमोशन पॉलिसी में लागू होगा। यही नहीं जिन डॉक्टरों का प्रमोशन हो चुका है वह भी इस दायरे में आएंगे। इस नियम के बाद उन्हें रिवर्ट कर दिया जाएगा। जब उनका समय पूरा होगा तब प्रमोट किया जाएगा। इस पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हैरानी जताई है कि स्वास्थ्य विभाग भविष्य तो छोड़ बैक डेट के भी नये नियम बनाता है।

पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने जताया विरोध
स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर पीजीआई के महिला डॉक्टरों का कहना है कि इस नियम के बाद तो उन्हें न शादी करनी चाहिए न बच्चे पैदा करने चाहिए। इन्होंने सवाल उठाया है कि स्वास्थ्य विभाग अपने यहां के डॉक्टरों पर इस नियम को क्यों नहीं लागू करता? पीजीआई ऑटोनोमस बॉडी है। यहां इस तरह के फैसले बगैर इसी और एसी की बैठक की मंजूरी के लागू नहीं हो सकते। कई डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले समय में डॉक्टर इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।
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