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लाखों कर्मियों के लिए राहत भरी खबर, अब यूं उठाएं इस सरकारी स्कीम का फायदा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Jul 2017 12:44 PM IST
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लाखों कर्मचारियों को बीजेपी सरकार ने बहुत बड़ी राहत दे दी है। सरकारी की स्कीम ऐसी है, जिसका फायदा उठाने के लिए बस एक शर्त पूरी करनी होगी। दरअसल, हरियाणा में कार्य स्थल पर ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर श्रमिकों एवं कामगारों के आश्रितों को अब बिना एफआईआर के वित्तीय सहायता मिलेगी। सीएम मनोहर लाल की मंजूरी के बाद सरकार ने मृतकों के आश्रितों को नियमों में ढील देते हुए बड़ी राहत प्रदान की है।
राज्य श्रम कल्याण बोर्ड की मुख्यमंत्री श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत अब अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ डीडीआर की प्रति प्रस्तुत करने पर सहायता अनुदान दे दिया जाएगा। अभी तक मृतक के आश्रित को वित्तीय सहायता एफआईआर की प्रति प्रस्तुत करने पर ही दी जाती थी। योजना में ही यह अनिवार्य किया गया है।
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राज्य श्रम कल्याण बोर्ड की मुख्यमंत्री श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत अब अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ डीडीआर की प्रति प्रस्तुत करने पर सहायता अनुदान दे दिया जाएगा। अभी तक मृतक के आश्रित को वित्तीय सहायता एफआईआर की प्रति प्रस्तुत करने पर ही दी जाती थी। योजना में ही यह अनिवार्य किया गया है।
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एफआईआर की बजाय डीडीआर की प्रति देनी होगी
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अब मृतक के आश्रित को एफआईआर की बजाय डीडीआर की प्रति मुहैया करानी होगी। यह निर्णय सभी लंबित आवेदनों पर भी लागू होगा। इससे पात्र लाभान्वितों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में हो रही अनावश्यक देरी से छुटकारा मिलेगा। हरियाणा में योजना के तहत कार्यस्थल पर ड्यूटी करते समय श्रमिक की मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है।
इस निर्णय से प्रदेश के कारखानों या उद्योगों में कार्य कर रहे हजारों पंजीकृत श्रमिक लाभान्वित होंगे। श्रम विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से यह समस्या सामने आ रही थी। कईमामलों में आश्रितों को एफआईआर देरी से दर्ज होने पर काफी समय वित्तीय सहायता का इंतजार करना पड़ता था। इसे देखते हुए श्रम विभाग ने सीएम को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा था।
इस निर्णय से प्रदेश के कारखानों या उद्योगों में कार्य कर रहे हजारों पंजीकृत श्रमिक लाभान्वित होंगे। श्रम विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से यह समस्या सामने आ रही थी। कईमामलों में आश्रितों को एफआईआर देरी से दर्ज होने पर काफी समय वित्तीय सहायता का इंतजार करना पड़ता था। इसे देखते हुए श्रम विभाग ने सीएम को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा था।