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जाट आंदोलनः अफसरों को सौंपी गई सुलह की कमान, 5 लोगों की कमेटी गठित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Feb 2017 09:23 AM IST
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जसिया में जाट समाज के धरने पर पहुंचे यशपाल मलिक ने चेताया
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारी जाटों से सुलह करने की कमान अफसरों को सौंप दी है और साथ ही पांच सदस्यीय एक कमेटी गठित की है। इसके साथ ही सरकार ने जाट आंदोलन के गति पकड़ने के साथ ही आंदोलनकारियों से वार्ता की नींव रख दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार देर शाम विश्वस्त उच्च अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक कर आंदोलन से पार पाने का खाका खींच लिया था। जिस पर मंगलवार से अमल शुरू हो गया।
सरकार ने आंदोलनकारियों से वार्ता और सुलह के लिए मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें जाट के साथ ही गैर जाट अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। समिति में मुख्य सचिव के अलावा गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव बिजेंद्र सिंह व एडीजीपी कानून व्यवस्था मोहम्मद अकील शामिल हैं।
बीते वर्ष फरवरी में हुए हिंसक जाट आंदोलन से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार वार्ता के लिए गठित समिति से मंत्रियों और अन्य नेताओं को दूर रखा है। मुख्यमंत्री जाट आंदोलन को लेकर पल-पल की फीडबैक ले रहे हैं। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों से भी फील्ड की रिपोर्ट ली है। इसके बाद पहले उच्च अधिकारियों से चर्चा की गई और फिर मंगलवार को मंत्रीसमूह की बैठक में जाट आरक्षण आंदोलन सुलझाने के लिए विचार-विमर्श किया।
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मंत्री समूह की अनौपचारिक बैठक के तत्काल बाद पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी गई। मुख्यमंत्री को शाम चार बजे दिल्ली के लिए रवाना होना था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम टाल दिया।
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सरकार ने आंदोलनकारियों से वार्ता और सुलह के लिए मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें जाट के साथ ही गैर जाट अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। समिति में मुख्य सचिव के अलावा गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव बिजेंद्र सिंह व एडीजीपी कानून व्यवस्था मोहम्मद अकील शामिल हैं।
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बीते वर्ष फरवरी में हुए हिंसक जाट आंदोलन से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार वार्ता के लिए गठित समिति से मंत्रियों और अन्य नेताओं को दूर रखा है। मुख्यमंत्री जाट आंदोलन को लेकर पल-पल की फीडबैक ले रहे हैं। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों से भी फील्ड की रिपोर्ट ली है। इसके बाद पहले उच्च अधिकारियों से चर्चा की गई और फिर मंगलवार को मंत्रीसमूह की बैठक में जाट आरक्षण आंदोलन सुलझाने के लिए विचार-विमर्श किया।
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मंत्री समूह की अनौपचारिक बैठक के तत्काल बाद पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी गई। मुख्यमंत्री को शाम चार बजे दिल्ली के लिए रवाना होना था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम टाल दिया।
लिखित या मौखिक रूप से रख सकते हैं अपनी बात
धरने पर डटे रहे जाट
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने कहा है कि आंदोलन से जुड़ा कोई भी संगठन, वर्ग या व्यक्ति अपने विचार एवं सुझाव कमेटी के सामने लिखित या मौखिक रूप में रख सकता है। कमेटी संविधान तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के इस संबंध में सुनाए गए विभिन्न निर्णयों एवं निर्देशों के दायरे में रहते हुए उनकी मांगों पर विचार करेगी। कमेटी की कोशिश रहेगी कि आंदोलनकारियों की समस्या का समाधान निकाला जाए।
चुनौती नहीं जाट आंदोलन : विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन एवं एसवाईएल का मुद्दा सरकार के लिए किसी तरह की चुनौती नहीं है।
जाट हमारा सबसे बड़ा कुनबा : शर्मा
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि मंत्रीसमूह की बैठक में सभी ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई है। आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे जाट हमारा सबसे बड़ा कुनबा हैं। अपनों से क्या निपटना, निपटा तो बेगानों से जाता है।
सरकार से अब कोई वार्ता नहीं : जाट नेता
सर्व जाट खाप पंचायत के प्रवक्ता सूबे सिंह समैण व जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने कहा कि सरकार के साथ अब वे कोई वार्ता नहीं करेंगे। 11 फरवरी तक का समय मांगें पूरी करने का लिए दिया है। मंगलवार को वार्ता का कोई न्योता उन्हें नहीं मिला।
चुनौती नहीं जाट आंदोलन : विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन एवं एसवाईएल का मुद्दा सरकार के लिए किसी तरह की चुनौती नहीं है।
जाट हमारा सबसे बड़ा कुनबा : शर्मा
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि मंत्रीसमूह की बैठक में सभी ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई है। आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे जाट हमारा सबसे बड़ा कुनबा हैं। अपनों से क्या निपटना, निपटा तो बेगानों से जाता है।
सरकार से अब कोई वार्ता नहीं : जाट नेता
सर्व जाट खाप पंचायत के प्रवक्ता सूबे सिंह समैण व जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने कहा कि सरकार के साथ अब वे कोई वार्ता नहीं करेंगे। 11 फरवरी तक का समय मांगें पूरी करने का लिए दिया है। मंगलवार को वार्ता का कोई न्योता उन्हें नहीं मिला।