{"_id":"5d5f8b238ebc3e6c8b44458a","slug":"haryana-governor-satyadev-narayan-arya-honour-to-urdu-writers","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"उर्दू भाषा में उत्कृष्ट योगदान देने पर 25 साहित्यकारों को किया गया सम्मानित, मिले लाखों के पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उर्दू भाषा में उत्कृष्ट योगदान देने पर 25 साहित्यकारों को किया गया सम्मानित, मिले लाखों के पुरस्कार
Fri, 23 Aug 2019 12:13 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 23 Aug 2019 12:13 PM IST
विज्ञापन
उर्दू साहित्यकारों का सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राचीन काल से सूफी संतों, कव्वालों तथा शायरों ने अपनी लेखनी का प्रयोग करके समाज को सभ्यता एवं सदाचार का रास्ता दिखाया है। साहित्य समाज का दर्पण है, इससे समाज की विभिन्न परंपराओं को बल मिलता है। भारतीय समाज में उर्दू, फारसी, हिंदी और अनेक क्षेत्रीय भाषाओं का समावेश है, जिससे अनेकता में भी एकता का दर्शन होता है। यह बातें हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने वीरवार को उर्दू भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 25 साहित्यकारों के सम्मान समारोह में कहीं। वे यहां मुख्य मेहमान थे।
इस मौके पर साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कारों और 21.73 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि साहित्यकारों को लेखनी से समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके। इससे समाज में जातिवाद व दहेज प्रथा दूर करने में सहायता मिलेगी तथा महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि उर्दू साहित्य में कव्वाली का अपना स्थान होता है, जो भी इसे देखता एवं सुनता है वह उसी का हो जाता है। कव्वाली से राष्ट्रीयता मजबूत हुई है और अपने प्राचीन इतिहास को सहजता से समझने में सहायक बनी है।
उन्होंने कहा कि मिर्जा गालिब उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर रहे हैं, जिन्होंने प्रेम एवं प्यार का रास्ता दिखाया है। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक समीर पाल सरो ने कहा कि उर्दू एक मीठी भाषा है, यह समाज को नया रास्ता दिखाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा एक सलीके की भाषा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मौके पर साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कारों और 21.73 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि साहित्यकारों को लेखनी से समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके। इससे समाज में जातिवाद व दहेज प्रथा दूर करने में सहायता मिलेगी तथा महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि उर्दू साहित्य में कव्वाली का अपना स्थान होता है, जो भी इसे देखता एवं सुनता है वह उसी का हो जाता है। कव्वाली से राष्ट्रीयता मजबूत हुई है और अपने प्राचीन इतिहास को सहजता से समझने में सहायक बनी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मिर्जा गालिब उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर रहे हैं, जिन्होंने प्रेम एवं प्यार का रास्ता दिखाया है। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक समीर पाल सरो ने कहा कि उर्दू एक मीठी भाषा है, यह समाज को नया रास्ता दिखाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा एक सलीके की भाषा है।
विज्ञापन
ये हैं विजेता
कार्यक्रम के दौरान 2017-18, 2018-19 के 25 विजेताओं को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। दो वर्षों में उर्दू अदब में विशिष्ट योगदान के लिए महेंद्र प्रताप चांद और बीडी कालिया हमदम को फख्र-ए-हरियाणा सम्मान दिया गया है। इसमें तीन लाख रुपये, हॉली अवार्ड के लिए 2.51 लाख रुपये तथा शेष सभी को 51 हजार रुपये की नकद राशि, शॉल, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किए गए।
इस दौरान डॉ केके ऋषि और डॉ कुमार पानीपती को हॉली पुरस्कार, डॉ. सुल्तान अंजुम और कृष्ण कुमार तूर को कंवर महेंद्र सिंह बेदी पुरस्कार, अनिल कौशिक और ज्योति संग को जसवंत सिंह टोहानवी सम्मान, डॉ. फरजाना नसीम और शम्स तबरेजी को साबिर पानीपती अवार्ड, टीएन राज व डॉ. रेणु बहल को उर्दू अनुवाद पुरस्कार, रमेंद्र जाखू साहिल, मुकेश गंभीर, डॉ. एचके लाल और डॉ. राजवंती मान को खिदमत-ए-अदब अवार्ड दिया गया। इसके साथ ही सुरेंद्र पंडित सोज-सम्मान से सुनीता रैना, एनडी सपरा को दिया जाएगा।
इसके अलावा, हरियाणा से संबंधित उर्दू अदब के लेखन का पुरस्कार डॉ. नासिर नकवी, कुंदन अरावली, प्रो. एमएम जुनेजा को बाल कृष्ण मुजतर सम्मान दिया जाएगा तथा डॉ. इंदु गुप्ता और ब्रज भूषण शर्मा को नौ आमौज पुरस्कार दिया जा रहा है। उर्दू गजल गायन के लिए आरडी कैले और रिंकू कालिया को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल, उर्दू साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा और पूर्व मुख्य सचिव शकुंतला जाखू उपस्थित थीं।
इस दौरान डॉ केके ऋषि और डॉ कुमार पानीपती को हॉली पुरस्कार, डॉ. सुल्तान अंजुम और कृष्ण कुमार तूर को कंवर महेंद्र सिंह बेदी पुरस्कार, अनिल कौशिक और ज्योति संग को जसवंत सिंह टोहानवी सम्मान, डॉ. फरजाना नसीम और शम्स तबरेजी को साबिर पानीपती अवार्ड, टीएन राज व डॉ. रेणु बहल को उर्दू अनुवाद पुरस्कार, रमेंद्र जाखू साहिल, मुकेश गंभीर, डॉ. एचके लाल और डॉ. राजवंती मान को खिदमत-ए-अदब अवार्ड दिया गया। इसके साथ ही सुरेंद्र पंडित सोज-सम्मान से सुनीता रैना, एनडी सपरा को दिया जाएगा।
इसके अलावा, हरियाणा से संबंधित उर्दू अदब के लेखन का पुरस्कार डॉ. नासिर नकवी, कुंदन अरावली, प्रो. एमएम जुनेजा को बाल कृष्ण मुजतर सम्मान दिया जाएगा तथा डॉ. इंदु गुप्ता और ब्रज भूषण शर्मा को नौ आमौज पुरस्कार दिया जा रहा है। उर्दू गजल गायन के लिए आरडी कैले और रिंकू कालिया को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल, उर्दू साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा और पूर्व मुख्य सचिव शकुंतला जाखू उपस्थित थीं।