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हरियाणाः अब मच्छरदानी से टकराते ही मर जाएंगे मच्छर और कीट-पतंगे, ग्रामीण इलाकों में बंटेंगी
Thu, 28 Nov 2019 11:08 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 Nov 2019 11:08 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हरियाणा में मच्छर जनित बुखार से लड़ने के लिए स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से गंभीर है। यह महकमे के प्रयास ही है कि पिछले पांच सालों में मलेरिया व डेंगू जैसे बुखार ग्रस्त मरीजों की संख्या में भी कमी आई है, लेकिन विभाग अब इस तरह के बुखार के मामलों को और अधिक नियंत्रित करते हुए लोगों को इस तरह के बुखार से सुरक्षा भी प्रदान करना चाहता है। इसके लिए टारगेट फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों को रखा गया है, जहां मच्छर जनित बुखार फैलने की संभावना और मच्छरों की फौज अपेक्षाकृत ज्यादा रहती है।
इसके लिए स्वास्थ्य महकमा द्वारा अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में एक खास कीटनाशक संबंधी मच्छरदानियां वितरित की जाएंगी। हरियाणा स्वास्थ्य महकमे ने इस योजना के तहत एक्सरसाइज शुरू कर दी है और स्वास्थ्य महकमे के इस प्रयास में केंद्र सरकार भी मदद करेगी। प्रदेश में यह मच्छरदानियां चरणबद्ध ढंग से विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बांटी जानी है। इसकी खासियम यह रहेगी कि इस कीटनाशक संबंधी मच्छरदानी से टकराते ही मच्छर व अन्य कीट पतंगा मर जाएगा।
इस ‘लांग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट’(एलएलआईएन) नामक मच्छरदानियों को केंद्र सरकार के वित्तीय सहयोग से उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रदेश में कई इलाके ऐसे हैं जहां मलेरिया और डेंगू बुखार के केस सबसे ज्यादा आते हैं। इनमें से डेंगू ग्रस्त क्षेत्रों में अंबाला, हिसार, रोहतक व सिरसा और मलेरिया ग्रस्त क्षेत्रों में फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, नूहं, पलवल, पंचकूला व रोहतक शामिल है। नूहं और पलवल को तो ज्यादा फोकस एरिया श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के बुखार की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
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स्वास्थ्य महकमे की डायरेक्टर हेल्थ सर्विसस डाक्टर उषा गुप्ता बताती हैं कि इस बुखार से निपटने के लिए अब एलएलआईएन वितरित की जा रही है। उनके अनुसार मेवात एरिया से इसकी शुरूआत की गई है, यहां अभी तक डेढ़ लाख से अधिक एलएलआईएन वितरित की जा चुकी है और अगले चरण में अब अन्य जिलों में वितरित की जानी है।
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इसके लिए स्वास्थ्य महकमा द्वारा अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में एक खास कीटनाशक संबंधी मच्छरदानियां वितरित की जाएंगी। हरियाणा स्वास्थ्य महकमे ने इस योजना के तहत एक्सरसाइज शुरू कर दी है और स्वास्थ्य महकमे के इस प्रयास में केंद्र सरकार भी मदद करेगी। प्रदेश में यह मच्छरदानियां चरणबद्ध ढंग से विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बांटी जानी है। इसकी खासियम यह रहेगी कि इस कीटनाशक संबंधी मच्छरदानी से टकराते ही मच्छर व अन्य कीट पतंगा मर जाएगा।
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इस ‘लांग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट’(एलएलआईएन) नामक मच्छरदानियों को केंद्र सरकार के वित्तीय सहयोग से उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रदेश में कई इलाके ऐसे हैं जहां मलेरिया और डेंगू बुखार के केस सबसे ज्यादा आते हैं। इनमें से डेंगू ग्रस्त क्षेत्रों में अंबाला, हिसार, रोहतक व सिरसा और मलेरिया ग्रस्त क्षेत्रों में फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, नूहं, पलवल, पंचकूला व रोहतक शामिल है। नूहं और पलवल को तो ज्यादा फोकस एरिया श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के बुखार की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
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स्वास्थ्य महकमे की डायरेक्टर हेल्थ सर्विसस डाक्टर उषा गुप्ता बताती हैं कि इस बुखार से निपटने के लिए अब एलएलआईएन वितरित की जा रही है। उनके अनुसार मेवात एरिया से इसकी शुरूआत की गई है, यहां अभी तक डेढ़ लाख से अधिक एलएलआईएन वितरित की जा चुकी है और अगले चरण में अब अन्य जिलों में वितरित की जानी है।
तीन साल तक प्रभावशाली रहेंगी मच्छरदानियां
हरियाणा सरकार ने इन कीटनाशक मच्छरदानियों के लिए अपनी डिमांड केंद्र को भेजी हुई है। 2.5 करोड़ की लागत से 4.80 लाख ‘लांग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट’ जल्द ही हरियाणा पहुंचेगी। इसके लिए वितीय मदद केंद्र द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी। इन मच्छरदानियों को नूहं के बाद अब मच्छर जनित बुखार की संभावनाओं वाले प्रदेश के अन्य हाई रिस्क प्रो एरिया में निशुल्क ग्रामीणों को बांटा जाना है।
इसकीटनाशक मच्छरदानियों पर जो कैमिकल लगाया जाएगा, वे तीन साल तक प्रभावशाली रहेगा, जिससे मच्छर व अन्य कीट पतंगा टकराते ही मर जाएगा। उल्लेखनीय है कि हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में आज भी बहुत से लोग अपनी चौपालों, बाड़ों व बरामदों में रात को मच्छरदानी लगाकर ही सोते हैं, इसलिए विभाग का फोकस सबसे पहले ग्रामीण इलाके हैं।
इसकीटनाशक मच्छरदानियों पर जो कैमिकल लगाया जाएगा, वे तीन साल तक प्रभावशाली रहेगा, जिससे मच्छर व अन्य कीट पतंगा टकराते ही मर जाएगा। उल्लेखनीय है कि हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में आज भी बहुत से लोग अपनी चौपालों, बाड़ों व बरामदों में रात को मच्छरदानी लगाकर ही सोते हैं, इसलिए विभाग का फोकस सबसे पहले ग्रामीण इलाके हैं।