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हरियाणा: जनसुविधाओं के लिए दान दी भूमि पर 20 साल बाद नहीं ठोक सकेंगे दावा, विधेयक लाएगी सरकार

Wed, 09 Feb 2022 12:04 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 09 Feb 2022 12:04 AM IST
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Haryana government to bring Haryana Public Suvidha Change Prohibition Bill 2022
मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

हरियाणा में जनसुविधाओं के लिए दान दी गई भूमि पर मालिक बीस साल बाद कोई दावा नहीं कर सकेंगे। भूमि मालिकों के दशकों बाद विवाद खड़ा करने के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार नया कानून जाने जा रही है। मंगलवार को मंत्रिमंडल बैठक में हरियाणा जनसुविधा परिवर्तन निषेध बिल-2022 विधानसभा में लाने के प्रशासनिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में अनेक जनसुविधाएं 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों, संस्थाओं की निजी भूमि पर अस्तित्व में हैं। इनमें सड़कें, सरकारी भवन, शैक्षणिक संस्थान, सिंचाई योजनाएं, जल चैनल आदि का निर्माण हुआ है। इनके लिए भूमि बिना किसी मुआवजे या प्रतिफल के दावे के बिना मौखिक समझौते या मौखिक उपहार के रूप में निजी व्यक्तियों ने दी हुई है। 
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प्रदेश में कुछ मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें दानकर्ताओं ने वर्षों पर भूमि पर दावा ठोक दिया। जिससे जनसुविधाओं को लेकर कानूनी अड़चनें खड़ी हो गईं। अनेक जगह लोगों ने सड़कें इत्यादि बंद कर दी। इसे देखते हुए सरकार यह कानून बनाने जा रही है कि दान दी गई भूमि को मालिक बीस साल के अंदर ही वापस ले सकेंगे। 2002 से पहले जनसुविधाओं के लिए दान दी गई जमीन पर अब किसी व्यक्ति या संस्था को कोई मालिकाना हक नहीं मिल पाएगा।
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इससे राज्य के सामंजस्यपूर्ण विकास में मदद मिलेगी। चूंकि, दान दी गई भूमि पर बने सरकारी भवनों से जनता को बड़े पैमाने पर लाभ मिल रहा है। लेकिन, भूमि के मूल्य में वृद्धि के कारण कुछ व्यक्तियों या निजी संस्थाओं ने मौखिक समझौतों या दान दी भूमि को चुनौती देकर अदालतों की शरण लेना शुरू कर दी। जिससे सरकार को सड़क संपर्क, जलापूर्ति में व्यवधान, प्रशासनिक समस्याओं और भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के राजस्व संसाधन सीमित हैं, इसलिए अतिरिक्त करों, उपकरों आदि के रूप में बोझ अंतत आम जनता पर ही पड़ता है। यह स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए कानून बनाने जा रहे हैं। 

बजट सत्र कितने दिन चलेगा, कार्य सलाहकार समिति की बैठक में होगा फैसला
मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी पत्रकार वार्ता में दी। बजट सत्र के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल और विधानसभा स्पीकर को पत्र भेजा जाएगा। सत्र कितने दिन चलेगा व बजट कब पेश होगा, इसका फैसला कार्य सलाहकार समिति की बैठक में होगा। सत्र की शुरूआत राज्यपाल अभिभाषण के साथ होगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अनेक जनसुविधाएं 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों, संस्थाओं की निजी भूमि पर अस्तित्व में हैं। इनमें सड़कें, सरकारी भवन, शैक्षणिक संस्थान, सिंचाई योजनाएं, जल चैनल आदि का निर्माण हुआ है। इनके लिए भूमि बिना किसी मुआवजे या प्रतिफल के दावे के बिना मौखिक समझौते या मौखिक उपहार के रूप में निजी व्यक्तियों ने दी हुई है। 

प्रदेश में कुछ मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें दानकर्ताओं ने वर्षों पर भूमि पर दावा ठोक दिया। जिससे जनसुविधाओं को लेकर कानूनी अड़चनें खड़ी हो गईं। अनेक जगह लोगों ने सड़कें इत्यादि बंद कर दी। इसे देखते हुए सरकार यह कानून बनाने जा रही है कि दान दी गई भूमि को मालिक बीस साल के अंदर ही वापस ले सकेंगे। 

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