कैबिनेट बैठकः हरियाणा में बस किराया, पेट्रोल-डीजल, फल-सब्जी महंगे, शराब पर लगेगा कोरोना सेस
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हरियाणा में बस किराया, पेट्रोल-डीजल और फल-सब्जियां महंगे हो गए हैं। कोरोना से उत्पन्न आर्थिक संकट से पार पाने को सरकार ने गुरुवार को सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अनेक कड़े निर्णय लिए हैं। इनसे जनता की जेब पर बोझ पड़ेगा। विपक्ष ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है।
कांग्रेस ने बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग की है। मंत्रिमंडल ने शराब पर सेस लगाने का भी निर्णय लिया है। कोरोना सेस की दर जल्दी तय की जाएगी। नई आबकारी नीति हरियाणा में मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह लागू हो सकती है। इस पर फैसला 3 मई के बाद लिया जाएगा। सरकार ने रोडवेज की साधारण, एसी, वॉल्वो व मर्सिडीज बसों का किराया बढ़ा दिया है। किलोमीटर अनुसार अलग-अलग दर प्रभावी होगी। पेट्रोल-डीजल पर 15 फीसदी वैट बढ़ाया गया है। पेट्रोल हरियाणा में 1 रुपये व डीजल 1.10 रुपये महंगा होगा।
मंडियों में फलों एवं सब्जियों की बिक्री पर एक प्रतिशत मार्केट फीस और एक प्रतिशत एचआरडीएफ यानि उपकर लगाया गया है। पंजाब में पहले से ही फलों एवं सब्जियों की बिक्री पर दो प्रतिशत मार्केट फीस और दो प्रतिशत उपकर लगाया जा रहा है। चंडीगढ़ में फलों एवं सब्जियों पर दो प्रतिशत मार्केट फीस है, जबकि हिमाचल प्रदेश व दिल्ली में फलों एवं सब्जियों पर एक प्रतिशत मार्केट फीस ली जा रही है।
ऐसे समझें किराए में वृद्धि
- साधारण बसों का किराया अब 85 पैसा प्रति यात्री प्रति किलोमीटर से बढ़कर एक रुपया प्रति यात्री प्रति किलोमीटर हो गया है।
- बसों की संचालन लागत जून, 2016 में 37.48 रुपये प्रति किलोमीटर थी, जो बढ़कर दिसंबर 2019 में 52.23 रुपये प्रति किलोमीटर हो गई है। उसे आंशिक रूप से पूरा करने को किराया बढ़ाया।
- यह वृद्धि वर्ष 2010-11 में की गई 25 प्रतिशत और वर्ष 2012-13 में की गई 20 प्रतिशत वृद्धि से कम है।
- संशोधन के अनुसार, साधारण बसों के किराये को 85 पैसे प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 रुपये प्रति किलोमीटर और 100 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए 1 रुपये 5 पैसे प्रति किलोमीटर किया गया है। इसके बावजूद हरियाणा में बस
- किराया पड़ोसी राज्यों पंजाब, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की तुलना में कम रहेगा।
- इससे पहले 30 जून, 2016 को बस किराया संशोधित किया गया था। साधारण बस का किराया 75 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 85 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किया गया था। इससे पूर्व, बस किराया 4 अक्तूबर, 2010 को 50 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 62.50 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर और 13 दिसंबर, 2012 को दोबारा 60 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 75 पैसे प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किया गया था।
- राज्य में बस संचालन लागत में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़े हुए खर्च के परिणामस्वरूप, हरियाणा रोडवेज भारी नुकसान के साथ कार्य कर रहा है। रोडवेज को चालू वित्त वर्ष में जनवरी, 2020 तक 726.21 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
- हीटिंग, वेंटिलेटिंग और एयर कंडीशनिंग बसें (हरियाणा रोडवेज के बेड़े में जोड़े जाने वाले वाहन की नई प्रकार की सेवा) शामिल हैं, के किराए को 1.50 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर तक बढ़ाया गया है। इंट्रा-स्टेट लग्जरी वातानुकूलित बसों (दिल्ली और चंडीगढ़ को जोड़ने वाला इंट्रा-स्टेट लॉन्ग रूट पर पुरानी वोल्वो/मर्सिडीज बसें चलाने का प्रस्ताव है) वोल्वो / मर्सिडीज के लिए 1.75 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर और सुपर लग्जरी एयर कंडीशन बसों, वोल्वो/मर्सिडीज (चंडीगढ़-दिल्ली-गुरुग्राम रूट पर परिचालन) का किराया बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किया गया है।
- न्यूनतम साधारण बस किराया (यात्री कर सहित) पांच रुपये होगा। व्यक्तिगत सामान के लिए किराया प्रति 40 किलोग्राम प्रति किलोमीटर के लिए साधारण बस के किराए का आधा होगा। इसी प्रकार, 40 किलोग्राम वजन से नीचे के व्यक्तिगत सामान के लिए कोई किराया नहीं लिया जाएगा।
पेट्रोल, डीजल की वृद्धि का गणित
संशोधनों के अनुसार पेट्रोल पर कर की दर 25 प्रतिशत (सरचार्ज समेत प्रभावी दर 26.25) और डीजल पर कर की दर 16.40 प्रतिशत (सरचार्ज समेत प्रभावी दर 17.22) होगी। 4 अक्तूबर, 2018 से पहले यही थी। कीमतें बढ़ने पर केंद्र के निर्देशानुसार वैट कम कर दिया गया था।
संशोधनों के अनुसार, जब डीजल के मामले में खुदरा बिक्री मूल्य 65.75 रुपये से अधिक होगा तो 17.22 प्रतिशत की यथामूल्य दर जबकि पेट्रोल के मामले में जब खुदरा बिक्री मूल्य 76.76 रुपये से अधिक होगा तो 26.25 प्रतिशत की यथामूल्य दर लागू होगी। इस वृद्धि से, राज्य प्रतिमाह लगभग 61 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर जुटाने में सक्षम होगा, जिसमें डीजल से प्रतिमाह 49 करोड़ रुपये तथा पेट्रोल से प्रतिमाह 12 करोड़ रुपये शामिल हैं।
एमएसएमई के कर्ज का पूरा ब्याज छह महीने के लिए माफ
हरियाणा सरकार ने एमएसएमई के कर्ज पर पूरा ब्याज छह महीने के लिए माफ कर दिया है। सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में आर्थिक संकट के समय हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम औद्योगिक इकाइयों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए ‘हरियाणा एमएसएमई बहाली ब्याज लाभ योजना’ तैयार की गई है ताकि वे स्थायी, अनुबंध पर लगे कर्मचारियों और श्रमिकों को वेतन का भुगतान कर सकें।
योजना के तहत 15 मार्च, 2020 तक या उससे पहले हरियाणा में कार्यरत सभी एमएसएमई इकाइयां प्रति कर्मचारी अधिकतम 20,000 रुपये तक कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों के भुगतान को लिए गए ऋणों पर छह महीनों की अवधि के लिए शत-प्रतिशत ब्याज लाभ की पात्र होंगी। एक लाभ बैंक, वित्तीय संस्थान को छह महीने की अवधि के लिए भुगतान किए गए ब्याज तक सीमित होगा।
ब्याज लाभ की गणना बैंक, वित्तीय संस्था सावधि ऋण, वर्किंग कैपिटल लोन पर अधिकतम 8 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर या वास्तविक ब्याज दर, जो भी कम हो पर करेगी। योजना का लाभ उठाने के लिए औद्योगिक इकाई में 1 फरवरी, 2020 और 15 मार्च, 2020 की अवधि के बीच कम से कम 80 प्रतिशत दिनों के लिए व्यावसायिक उत्पादन होना जरूरी है।
व्यावसायिक उत्पादन में आने के बाद इकाई ने आईईएम, ईएम, यूएएम दाखिल किया हो और लॉकडाउन अवधि के दौरान पुन: संचालन अनुमति लेने की तिथि से एक महीने के भीतर या 30 जून तक बैंक, वित्तीय संस्थान से सावधि ऋण, वर्किंग कैपिटल लोन लिया हो। योजना सरकार की गजट अधिसूचना की तिथि से लागू होगी और तीन महीने बाद तक चलेगी।