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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana government's tough stance on mewat beef biryani case, police filed zero FIR

बिरयानी के नाम पर बीफ बेचा, अब दर्ज हुई जीरो FIR, देखिए पूरा मामला

Sun, 07 May 2017 12:29 PM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 07 May 2017 12:29 PM IST
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Haryana government's tough stance on mewat beef biryani case, police filed zero FIR
बिरयानी के नाम पर बीफ
बिरयानी के नाम पर बीफ बेचे जाने का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मामले में 7 दुकानदारों और एक डॉक्टर पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। मामला हरियाणा के मेवात जिले के फिरोजपुर झिरका में सामने आया। नई दिल्ली के प्रशांत विहार थाने में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के मास्टर ट्रेनर नरेश कादयान ने एफआईआर दर्ज कराई है, जो फिरोजपुर झिरका के सात विक्रेताओं और वेटरिनरी सर्जन के खिलाफ है।
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कादयान ने आवश्यक कार्रवाई के लिए एफआईआर की प्रतिलिपि हरियाणा के मुख्य सचिव, डीजीपी, गोसेवा आयोग, एनिमल वेलफेयर बोर्ड, लोकायुक्त, रजिस्ट्रार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा मानवाधिकार आयोग, डीसी और एसपी मेवात, भारत सरकार के एनिमल वेलफेयर बोर्ड, एसएचओ फिरोजपुर झिरका और दिल्ली में हरियाणा के स्थानीय आयुक्त को भेज दी है।
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बिरयानी विक्रेताओं और वेटरिनरी सर्जन पर प्रीवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल एक्ट, हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है।
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यह है मामला

Haryana government's tough stance on mewat beef biryani case, police filed zero FIR
बीफ
बीते वर्ष फिरोजपुर झिरका के सात बिरयानी विक्रेताओं की दुकानों से मांस के टुकड़े नमूने के तौर पर लिए गए थे। इन्हें 24 अगस्त 2016 को फिरोजपुर झिरका के वेटरिनरी सर्जन डॉ. अमर सिंह सोलंकी ने लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज हिसार के पब्लिक हेल्थ एंड एपिडेमियोलॉजी विभाग को जांच के लिए भेजा। विभाग ने 6 सितंबर 2016 को जांच में यह साफ कर दिया कि सातों सैंपल पशुओं की नस्ल केहैं, लेकिन वेटरिनरी सर्जन ने रिपोर्ट दबाए रखी और कार्रवाई नहीं की।

सैंपल लेने के बाद दर्ज करानी चाहिए थी एफआईआर

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मीट विक्रेता - फोटो : self
नरेश कादयान का कहना है कि गो सेवा आयोग के निर्देश पर वेटरिनरी सर्जन फिरोजपुर झिरका ने सात दुकानों से बीफ बिरयानी के सैंपल उठाए थे। इन्हें फूड सेफ्टी अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की गैर मौजूदगी में उठाया गया।

उसी समय वेटरिनरी सर्जन को एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। अब जब हिसार यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि हो चुकी है तब भी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। इसलिए उन्हें प्रशांत विहार दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।

हिसार यूनिवर्सिटी की जांच रिपोर्ट

Haryana government's tough stance on mewat beef biryani case, police filed zero FIR
मेवात के फिरोजपुर झिरका में बिरयानी से एकत्रित मांस के सैंपल भैंस, बैल या ऊंट आदि पशुओं में से किसी के हैं। हिसार यूनिवर्सिटी की जांच रिपोर्ट में मांस के टुकड़ों को गाय को छोड़कर इन पशुओं में से ही बताया गया है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया ने ऊंट के मांस को तो पूरी तरह से वैन किया है, जबकि अन्य पशुओं के मांस को मनुष्य के लिए अनहाईजैनिक (अन उपयुक्त) बताया है। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार इनकी बिरयानी में बिक्री पर भी केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है।
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