{"_id":"57f7fd4c4f1c1b6a5326fcbb","slug":"haryana-government-relief-central-administrative-tribunal","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बड़ी राहत: नॉन एससीएस अफसरों के IAS बनने का रास्ता साफ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़ी राहत: नॉन एससीएस अफसरों के IAS बनने का रास्ता साफ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Oct 2016 01:23 AM IST
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सीएम खट्टर
- फोटो : File Photo
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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने हरियाणा सरकार को राहत देते हुए एक मामले में अंतरिम राहत पर रोक हटा ली है। इस रोक के हटने से आईएएस के लिए हरियाणा सरकार को नॉन स्टेट सिविल
सर्विस (एससीएस) अफसरों में से चयन सूची 2015 के लिए चयन और नियुक्ति को मंजूरी मिल जाएगी।
ट्रिब्यूनल ने 3 अगस्त को इस मामले में स्टे लगाई थी। वहीं, मामले में फ्लाइंग स्क्वायड ऑफिसर (एफएसओ), आईएसबीटी दिल्ली द्वारा दायर याचिका पर अंतिम नतीजा 20 अक्तूबर को आएगा।
याचिका में राज्य द्वारा चयन के लिए सिफारिश किए गए पैनल को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा, ‘याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए अंतरिम रोक के फैसले को आगे नहीं बढ़ाया जा
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सकता। ऐसे में 3 अगस्त को दिए संबंधित आदेश को रद्द कर दिया गया है।
ऐसे में अब प्रतिवादी पक्ष संबंधित पद के लिए चयन और नियुक्ति पर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन यह मूल याचिका के
नतीजे पर निर्भर होगी।’ वहीं इससे पहले सुनवाई के दौरान हरियाणा की ओर तरफ से पेश काउंसिल ने कहा कि अगर मामले में स्टे जारी रहती है तो संबंधित पद के लिए नॉन एससीएस कोटा 31
दिसंबर 2016 के बाद छूट जाएगा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्टे जारी रखने की स्थिति में न केवल निजी प्रतिवादी बल्कि आवेदक आवेदकों को भी कोटा छूट जाने पर नुकसान सहना पड़ेगा।
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सर्विस (एससीएस) अफसरों में से चयन सूची 2015 के लिए चयन और नियुक्ति को मंजूरी मिल जाएगी।
ट्रिब्यूनल ने 3 अगस्त को इस मामले में स्टे लगाई थी। वहीं, मामले में फ्लाइंग स्क्वायड ऑफिसर (एफएसओ), आईएसबीटी दिल्ली द्वारा दायर याचिका पर अंतिम नतीजा 20 अक्तूबर को आएगा।
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याचिका में राज्य द्वारा चयन के लिए सिफारिश किए गए पैनल को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा, ‘याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए अंतरिम रोक के फैसले को आगे नहीं बढ़ाया जा
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सकता। ऐसे में 3 अगस्त को दिए संबंधित आदेश को रद्द कर दिया गया है।
ऐसे में अब प्रतिवादी पक्ष संबंधित पद के लिए चयन और नियुक्ति पर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन यह मूल याचिका के
नतीजे पर निर्भर होगी।’ वहीं इससे पहले सुनवाई के दौरान हरियाणा की ओर तरफ से पेश काउंसिल ने कहा कि अगर मामले में स्टे जारी रहती है तो संबंधित पद के लिए नॉन एससीएस कोटा 31
दिसंबर 2016 के बाद छूट जाएगा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्टे जारी रखने की स्थिति में न केवल निजी प्रतिवादी बल्कि आवेदक आवेदकों को भी कोटा छूट जाने पर नुकसान सहना पड़ेगा।
यूपीएससी को दी गई सिफारिश को दी थी चुनौती
यूपीएससी
- फोटो : pti
फ्लाइंग स्क्वायड ऑफिसर महेंद्रगढ़ हरियाणा के 53 वर्षीय लाजपत रॉय ने यूपीएससी, हरियाणा राज्य, स्क्रीनिंग कमेटी, आईएएस कैडर के एचसीएस ऑफिसर आशा शर्मा (मेडिकल ऑफिसर), गुरमीत
कौर (सीनियर टॉउन प्लानर), रामेश्वर मेहरा (एडिशनल एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर), राकेश तलवार (मेडिकल ऑफिसर), सोनिया त्रिखा (डायरेक्टर हेल्थ डिपार्टमेंट) के खिलाफ 1 अगस्त
को कैट में याचिका दायर की थी।
याचिका में उन्होंने संबंधित पोस्ट के लिए राज्य द्वारा यूपीएससी को दी गई सिफारिश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता समेत अन्य निजी प्रतिवादियों के नाम राज्य सरकार को संबंधित पोस्ट के लिए दिए गए थे। राज्य ने स्क्रीनिंग कमेटी गठित की थी।
महिला अफसरों को प्राथमिकता देने का था आरोप
24 जून, 2016 को स्क्रीनिंग कमेटी ने निजी प्रतिवादियों के पैनल को यूपीएससी के पास भेजने की सिफारिश की थी। हरियाणा सरकार ने आगे इस पैनल की यूपीएससी के लिए सिफारिश की थी। लाजपत
ने आरोप लगाया था कि कमेटी ने केवल महिला अफसरों को प्राथमिकता दी, जबकि आईएएस नियमों के तहत परीक्षार्थियों पर सिर्फ ऑउटस्टैंडिंग मेरिट व योग्यता के आधार पर ही विचार किया जा
सकता है। यूपीएससी ने मामले में कै ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद राज्य का प्रस्ताव 17 अगस्त को लौटा दिया था।
इसी बीच हरियाणा सरकार ने कहा कि संबंधित पैनल की सिफारिश ऑउटस्टैंडिंग
योग्यता व मेरिट के आधार पर ही हुई थी। हालांकि यह पाया गया था कि महिला परीक्षार्थियों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि हरियाणा में कोई भी महिला आईएएस अधिकारी एससीएस कोटे से नियुक्त नहीं
हुई। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने यह भी पाया था कि लाजपत रॉय को उनके एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्रेटरी ने आउटस्टैंडिंग मेरिट व योग्यता के लिए सर्टिफाई नहीं किया था। ऐसे में वह पैनल के लिए योग्य नहीं थे।
कौर (सीनियर टॉउन प्लानर), रामेश्वर मेहरा (एडिशनल एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर), राकेश तलवार (मेडिकल ऑफिसर), सोनिया त्रिखा (डायरेक्टर हेल्थ डिपार्टमेंट) के खिलाफ 1 अगस्त
को कैट में याचिका दायर की थी।
याचिका में उन्होंने संबंधित पोस्ट के लिए राज्य द्वारा यूपीएससी को दी गई सिफारिश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता समेत अन्य निजी प्रतिवादियों के नाम राज्य सरकार को संबंधित पोस्ट के लिए दिए गए थे। राज्य ने स्क्रीनिंग कमेटी गठित की थी।
महिला अफसरों को प्राथमिकता देने का था आरोप
24 जून, 2016 को स्क्रीनिंग कमेटी ने निजी प्रतिवादियों के पैनल को यूपीएससी के पास भेजने की सिफारिश की थी। हरियाणा सरकार ने आगे इस पैनल की यूपीएससी के लिए सिफारिश की थी। लाजपत
ने आरोप लगाया था कि कमेटी ने केवल महिला अफसरों को प्राथमिकता दी, जबकि आईएएस नियमों के तहत परीक्षार्थियों पर सिर्फ ऑउटस्टैंडिंग मेरिट व योग्यता के आधार पर ही विचार किया जा
सकता है। यूपीएससी ने मामले में कै ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद राज्य का प्रस्ताव 17 अगस्त को लौटा दिया था।
इसी बीच हरियाणा सरकार ने कहा कि संबंधित पैनल की सिफारिश ऑउटस्टैंडिंग
योग्यता व मेरिट के आधार पर ही हुई थी। हालांकि यह पाया गया था कि महिला परीक्षार्थियों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि हरियाणा में कोई भी महिला आईएएस अधिकारी एससीएस कोटे से नियुक्त नहीं
हुई। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने यह भी पाया था कि लाजपत रॉय को उनके एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्रेटरी ने आउटस्टैंडिंग मेरिट व योग्यता के लिए सर्टिफाई नहीं किया था। ऐसे में वह पैनल के लिए योग्य नहीं थे।