{"_id":"5a3f87274f1c1bd0408bebec","slug":"haryana-government-relased-circular-for-officers","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों के लिए राहत, अफसरों को मुहर लगाकर देनी होगी शिकायतों की रसीद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों के लिए राहत, अफसरों को मुहर लगाकर देनी होगी शिकायतों की रसीद
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
Updated Sun, 24 Dec 2017 04:23 PM IST
विज्ञापन
स्टांप ड्यूटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब सरकारी विभागों के अधिकारी जनता की शिकायतों को भूल नहीं पाएंगे। अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत की सरकारी मुहर लगाकर रसीद देनी होगी। सरकारी दफ्तरों में इस नई परंपरा को शुरू करने का आदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को यहां आयोजित जनता दरबार में दिया। जनता दरबार में सीएम मनोहर लाल ने कहा कि अधिकारी लोगों की शिकायतों का समाधान करने के बजाय टहलाते रहते हैं। अब उन्हें यह नीति छोड़नी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अधिकारियों को जनता की शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इन शिकायतों को नंबर लगाकर संबंधित व्यक्ति को रसीद देनी होगी, ताकि शिकायतकर्ता रसीद को सबूत के तौर पर प्रस्तुत कर सके। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता आम नागरिक को न्याय देना और उनकी छोटी से छोटी समस्या का समाधान करना है।
बता दें कि जनता दरबार और जिला कष्ट निवारण समिति की बैठकों में अधिकारी यह कहकर शिकायतकर्ता की समस्या से पल्ला झाड़ लेते हैं कि संबंधित शिकायत उनके संज्ञान में नहीं लाई गई। जनता दरबार में 207 शिकायतें आईं। इनमें से अधिकतर लोगों की शिकायतें थीं कि उनकी समस्या पर कई सालों से कार्रवाई नहीं हुई है। जब मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा तो उन्होंने मना कर दिया कि उनके पास शिकायत आई ही नहीं।
विज्ञापन
इसके बाद सीएम ने शिकायतों का पंजीकरण करना और रसीद पर मुहर लगाकर देना अनिवार्य बना दिया।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अधिकारियों को जनता की शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इन शिकायतों को नंबर लगाकर संबंधित व्यक्ति को रसीद देनी होगी, ताकि शिकायतकर्ता रसीद को सबूत के तौर पर प्रस्तुत कर सके। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता आम नागरिक को न्याय देना और उनकी छोटी से छोटी समस्या का समाधान करना है।
विज्ञापन
बता दें कि जनता दरबार और जिला कष्ट निवारण समिति की बैठकों में अधिकारी यह कहकर शिकायतकर्ता की समस्या से पल्ला झाड़ लेते हैं कि संबंधित शिकायत उनके संज्ञान में नहीं लाई गई। जनता दरबार में 207 शिकायतें आईं। इनमें से अधिकतर लोगों की शिकायतें थीं कि उनकी समस्या पर कई सालों से कार्रवाई नहीं हुई है। जब मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा तो उन्होंने मना कर दिया कि उनके पास शिकायत आई ही नहीं।
विज्ञापन
इसके बाद सीएम ने शिकायतों का पंजीकरण करना और रसीद पर मुहर लगाकर देना अनिवार्य बना दिया।