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सुप्रीम कोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार: निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को आरक्षण के कानून पर हाईकोर्ट की रोक को चुनौती, सात फरवरी को होगी सुनवाई

Fri, 04 Feb 2022 11:17 AM IST
निवेदिता वर्मा राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 04 Feb 2022 11:17 AM IST
सार

गुरुवार को हरियाणा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के निवासियों को दिए गए 75 प्रतिशत आरक्षण पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।

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Haryana Government moves Supreme Court challenging Punjab-Haryana High Court order staying the law on quota to locals in private sector
मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

हरियाणा में निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए 75 फीसदी आरक्षण देने वाले हरियाणा के कानून पर रोक लगाने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हरियाणा सरकार ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को ही आदेश पारित किया था। 

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सीजेआई एनवी रमण की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मुझे 90 सेकंड सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और वैधानिक अधिनियम पर रोक लगा दी। आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने की स्थिति में कृपया सोमवार को सुनवाई की जाए। जिसके बाद सीजेआई ने इस शर्त पर याचिका सोमवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई कि आदेश उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
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हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम 2020 को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर बृहस्पतिवार को जस्टिस अजय तिवारी और जस्टिस पंकज जैन की खंडपीठ ने कानून पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह आदेश फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) की रिट याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है।
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क्या है मामला 
हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम, 2020 को छह नवंबर, 2021 को अधिसूचित किया गया था। इसके तहत निजी क्षेत्र की 30 हजार रुपये से कम वेतन वाली नौकरियों में स्थानीय उम्मीदवारों को 75 फीसदी आरक्षण प्रदान करने की बात है। यह अधिनियम 15 जनवरी, 2022 से प्रभावी होने वाला था। यह कानून सभी कंपनियों, समितियों, ट्रस्टों, एलएलपी फर्म, साझेदारी फर्मों और दस या अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने वाले किसी भी नियोक्ता पर लागू होता है। लेकिन इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार या उनके स्वामित्व वाले किसी भी संगठन को शामिल नहीं किया गया है। 

युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए मजबूत पैरवी करेंगे: मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम, 2020 पर अंतरिम रोक लगाने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले की पैरवी मजबूती से करेंगे, ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रख सकें। यह कानून राज्य के युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए लागू किया है। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हरियाणा सरकार की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना पीठ के समक्ष शुक्रवार को पेश हुए। मेहता ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार का बचाव करने के लिए हाईकोर्ट में केवल 90 सेकंड का समय मिला था। उनके अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी 2022 को सुनवाई तय की है।

उद्योगपतियों से भी करूंगा बातचीत: दुष्यंत 
हरियाणा में निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इस मामले में वह हरियाणा के उद्योगपतियों से भी बातचीत करेंगे। उन्होंने बताया कि शनिवार को पानीपत में हैंडलूम उद्योगपतियों से बातचीत करेंगे, 13 को गुरुग्राम में और 18 को बहादुरगढ़ के फुटवियर पार्क के उद्यमियों से बातचीत की जाएगी। इस कानून को उद्योगों के लिए भी फायदेमंद बताते हुए उन्होंने कहा कि सोनीपत में एक इंडस्ट्री के वर्क फोर्स में 90 फीसदी स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों की सभी शंकाओं और दिक्कतों के लिए वैकल्पिक प्रावधान कानून में दिए गए हैं।

75 फीसदी आरक्षण कोहनी पर रखे गुड़ जैसा, जिसे खाया नहीं जा सकता: हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार का निजी नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून कोहनी पर रखे गुड़ जैसा है, जिसे कभी खाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रोजगार देने में विफल सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए हवाई जुमले गढ़ रही है। निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण से प्रदेश के मूल निवासियों को कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि सरकार ने डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) के लिए 15 साल की शर्त को घटाकर 5 साल कर दिया है। ऐसे में अन्य राज्य का कोई भी व्यक्ति प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र हासिल कर सकता है, जिसके बाद नौकरी हासिल कर लेगा।

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