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राहत: यमुना की बुर्द बरामद जमीन का किसानों को मिलेगा मालिकाना हक, विधानसभा में विधेयक लाकर कानून बनाएगी सरकार
Thu, 11 Aug 2022 09:00 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 11 Aug 2022 09:00 AM IST
सार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में कहा कि यमुना किनारे की सरप्लस और बची हुई जमीन की न अब चकबंदी होगी, न किसानों में बंटवारा किया जाएगा। जो मालिकान शामलात देह जमीन पहले से किसानों के नाम है वही रहेगी।
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हरियाणा मानसून सत्र।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा सरकार ने हजारों किसानों को बड़ी राहत दी है। यमुना खादर की बुर्द बरामद जमीन उनके नाम ही रहेंगी। सरकार विधानसभा में विधेयक लाकर कानून बनाएगी और किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में कहा कि यमुना किनारे की सरप्लस और बची हुई जमीन की न अब चकबंदी होगी, न किसानों में बंटवारा किया जाएगा। जो मालिकान शामलात देह जमीन पहले से किसानों के नाम है वही रहेगी।
नदी किनारे की जमीन बहाव के कारण बदलती रहती है। उस जमीन को सही मालिक या हकदार को दिलाना सरकार का कर्तव्य है। बुर्द जमीन को पहले शामलात में दर्ज किया जाता है, उसके बाद यह देखते हैं कि कितनी जमीन जमीन में गई थी कितनी वापस आई है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि शामलात देह और मुसतर्का मालिकान की जमीनें पंचायतों के नाम की जाएंगी। इन जमीनों पर जो लोग काबिल हैं, मालिकाना हक उनके नाम ही रहेगा। जमीन का इंतकाल पंचायत के नाम होगा। इसमें चिंता का कोई विषय नहीं है। इसका मुख्य मकसद जमीनों के अवैध हस्तांतरण को रोकना है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में कहा कि यमुना किनारे की सरप्लस और बची हुई जमीन की न अब चकबंदी होगी, न किसानों में बंटवारा किया जाएगा। जो मालिकान शामलात देह जमीन पहले से किसानों के नाम है वही रहेगी।
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नदी किनारे की जमीन बहाव के कारण बदलती रहती है। उस जमीन को सही मालिक या हकदार को दिलाना सरकार का कर्तव्य है। बुर्द जमीन को पहले शामलात में दर्ज किया जाता है, उसके बाद यह देखते हैं कि कितनी जमीन जमीन में गई थी कितनी वापस आई है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि शामलात देह और मुसतर्का मालिकान की जमीनें पंचायतों के नाम की जाएंगी। इन जमीनों पर जो लोग काबिल हैं, मालिकाना हक उनके नाम ही रहेगा। जमीन का इंतकाल पंचायत के नाम होगा। इसमें चिंता का कोई विषय नहीं है। इसका मुख्य मकसद जमीनों के अवैध हस्तांतरण को रोकना है।
पंचायत की कुछ शामलात देह भूमि के इंतकाल निजी लोगों के नाम हो रखे हैं। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया तो वे इस जमीन को बेचते रहेंगे। इसे नियंत्रित करना जरूरी है, अगर नहीं करेंगे तो एक समय यह विषय सरकार के नियंत्रण से भी बाहर हो जाएगा। इंतकाल के बाद जमीन आगे नहीं बेची जा सकेगी।
शामलात देह और मुसतर्का मालिकान की जमीन पंचायतों के नाम करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद की उलझनों का अध्ययन कर रहे हैं। विश्वेदारों की सीमा के बाहर की जमीन पंचायत की होगी। जो भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए रखी गई थी और विश्वेदारों की सीलिंग के भीतर है, वे भी पंचायतों के नाम की जाएगी। इन जमीनों को लेकर कानूनी राय भी ले रहे हैं। जिन जमीनों पर बड़ी संख्या में लोग काबिज हैं और घर या कॉलोनी बनी हुई हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।
चकबंदी कानून में संशोधन करें : हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सीएम के जवाब पर कहा कि पंचायत देह और मुसतर्का मालिकान की जमीनों का इंतकाल रद्द करने से झगड़े बढ़ेंगे। इससे बचने के लिए चकबंदी कानून में संशोधन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का गहनता से अध्ययन कर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। जिलों में डीसी तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे लोग चिंतित हैं।
यमुना किनारे की हजारों एकड़ भूमि का लेकर विवाद
हरियाणा में यमुना की बुर्द बरामद जमीनों को लेकर अनेक विवाद चल रहे हैं। ये जमीन मालिकान शामलात देह की हैं, लेकिन इनमें अनेक ग्रामीण नए सिरे से चकबंदी कराकर हिस्सा चाह रहे हैं। पानीपत के हथवाला गांव में तो अधिकारियों ने 2106 जमीन की नई सिरे से चकबंदी कर बड़ा गड़बड़झाला कर दिया था, जो ग्रामीणों के आंदोलन के बाद उजागर हुआ। पानीपत की एडीसी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति गलत चकबंदी को रद्द करने की सिफारिश कर चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग हथवाला और प्रदेश में अन्य जगह इस तरह के मामलों में नए सिरे से चकबंदी करने पर पहले ही रोक लगा चुका है।
शामलात देह और मुसतर्का मालिकान की जमीन पंचायतों के नाम करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद की उलझनों का अध्ययन कर रहे हैं। विश्वेदारों की सीमा के बाहर की जमीन पंचायत की होगी। जो भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए रखी गई थी और विश्वेदारों की सीलिंग के भीतर है, वे भी पंचायतों के नाम की जाएगी। इन जमीनों को लेकर कानूनी राय भी ले रहे हैं। जिन जमीनों पर बड़ी संख्या में लोग काबिज हैं और घर या कॉलोनी बनी हुई हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।
चकबंदी कानून में संशोधन करें : हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सीएम के जवाब पर कहा कि पंचायत देह और मुसतर्का मालिकान की जमीनों का इंतकाल रद्द करने से झगड़े बढ़ेंगे। इससे बचने के लिए चकबंदी कानून में संशोधन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का गहनता से अध्ययन कर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। जिलों में डीसी तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे लोग चिंतित हैं।
यमुना किनारे की हजारों एकड़ भूमि का लेकर विवाद
हरियाणा में यमुना की बुर्द बरामद जमीनों को लेकर अनेक विवाद चल रहे हैं। ये जमीन मालिकान शामलात देह की हैं, लेकिन इनमें अनेक ग्रामीण नए सिरे से चकबंदी कराकर हिस्सा चाह रहे हैं। पानीपत के हथवाला गांव में तो अधिकारियों ने 2106 जमीन की नई सिरे से चकबंदी कर बड़ा गड़बड़झाला कर दिया था, जो ग्रामीणों के आंदोलन के बाद उजागर हुआ। पानीपत की एडीसी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति गलत चकबंदी को रद्द करने की सिफारिश कर चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग हथवाला और प्रदेश में अन्य जगह इस तरह के मामलों में नए सिरे से चकबंदी करने पर पहले ही रोक लगा चुका है।
अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था मामला
पानीपत के हथवाला में यमुना खादर की जमीन की गलत चकबंदी का मामला सात और आठ जुलाई को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन और चकबंदी विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। उसके बाद राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए थे।
विधायकों ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
पानीपत के विधायक महिपाल ढांडा, पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता, कांग्रेस विधायक रेणु बाला इत्यादि ने बुधवार को विधानसभा में यमुना खादर और शामलात देह की जमीनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जमीनें किसानों व अन्य लोगों के नाम ही रहने की मांग की। महिपाल ने सरकार को पानीपत में बुर्द बरामद जमीनों से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे। जरावता ने कहा कि हरियाणा में 50 लाख भूमिहीन हैं। जो लोग शामलात देह व मुसतर्का मालिकान जमीन में रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ा न जाए।
विधायकों ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
पानीपत के विधायक महिपाल ढांडा, पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता, कांग्रेस विधायक रेणु बाला इत्यादि ने बुधवार को विधानसभा में यमुना खादर और शामलात देह की जमीनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जमीनें किसानों व अन्य लोगों के नाम ही रहने की मांग की। महिपाल ने सरकार को पानीपत में बुर्द बरामद जमीनों से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे। जरावता ने कहा कि हरियाणा में 50 लाख भूमिहीन हैं। जो लोग शामलात देह व मुसतर्का मालिकान जमीन में रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ा न जाए।