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पहले जमीन ...बाद में फसलें, कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग के कानून से भी आशंकित हैं हरियाणा के किसान
Mon, 30 Nov 2020 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 30 Nov 2020 02:49 AM IST
सार
- गेहूं की बिजाई हो चुकी पूरी, सरसों कटाई में अभी काफी समय
- फसल को पानी लगाने का काम महिलाओं, पड़ोसियों के जिम्मे छोड़ा
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आंदोलनरत किसान...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत हरियाणा के किसान कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये अपनी जमीन पूंजीपतियों के पास चले जाने को लेकर आशंकित हैं। इससे डरे किसानों ने का एजेंडा अपनी जमीनों को पूंजीपतियों के हाथों में जाने से बचाना भी है। फसलों की फिलहाल उन्हें इतनी चिंता नहीं है।
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हरियाणा में गेहूं की बिजाई का काम पूरा हो चुका है, जबकि सरसों की कटाई में अभी काफी समय शेष है। भाकियू हरियाणा के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि नए कानूनों के लागू होने के बाद कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये किसानों की जमीन पूंजीपतियों के हाथ चली जाएगी। जब जमीन ही नहीं रहेगी तो फसल कहां से होगी। इसलिए किसान वर्तमान में गेहूं, सरसों, चना सहित अन्य नकदी फसलों के बारे में नहीं सोच रहा। उसकी पहली लड़ाई अपनी जमीन को बचाने की है।
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उन्होंने बताया कि फसलों को पानी लगाने का जिम्मा घर की महिलाएं संभाल रही हैं। जिन घरों में महिलाएं बुजुर्ग हैं, वहां पर पड़ोसी एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। किसान नेता कर्म सिंह मथाना कहते हैं कि कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए यह आरपार की लड़ाई है। यह कब तक चले, किसान नहीं जानते। इसलिए फसलों में कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के बारे में घर पर मौजूद महिलाओं को समझा दिया गया है। वह मजदूरों की मदद जरूरत पड़ने पर ले लेंगी।
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बड़ी मात्रा में रसद साथ, स्वयंसेवी संस्थाएं कर रहीं मदद
राकेश बैंस ने बताया कि किसान बड़ी मात्रा में रसद साथ लेकर आंदोलन में आए हैं। कुछ समाज सेवी संस्थाओं ने मदद को हाथ आगे बढ़ाया है। खाप भी समर्थन में आई हैं। यह लड़ाई किसान के साथ आम आदमी की भी है। चूंकि, हरियाणा प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में एक है।
अपने दम पर किसानों का आंदोलन
भाकियू हरियाणा के प्रधान गुरनाम चढूनी ने कहा कि भले राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है, लेकिन उनसे किसी भी प्रकार की मदद किसान संगठन नहीं ले रहे। यह किसानों की अपनी लड़ाई है, जिसे वे संगठित होकर जीतेंगे। किसानों को बदनाम करने वालों को मुंह की खानी पड़ेगी।