मिलिए, हरियाणा के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों से
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विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने के साथ ही हरियाणा में मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पद के दावेदारी को लेकर भाजपा- हजकां गठबंधन की दरार चौड़ी होती जा रही है। सभी दलों को उम्मीद है कि वे सत्ता पर काबिज होकर हरियाणा में मुख्यमंत्री के तौर पर मिसाल पेश करेंगे।
जातीय समीकरण और अपने अपने राजनीतक कद के हिसाब से राजनेता मुख्यमंत्री बनने का सपना संजो रहे हैं। चेहरों के इस चक्रव्यूह में कौन सा चेहरा हरियाणा की जनता का नेतृत्व करेगा यह विधानसभा चुनाव के बाद स्पष्ट होगा।
भाजपा की लिस्ट लंबी
भाजपा नेताओं में मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले लोग अधिक हैं। हालांकि अभी विधानसभा चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन इस समय भाजपा में मुख्यमंत्री पद का सपना देखने वालों की लिस्ट लंबी है। आमतौर पर राज्य में दो दल इनेलो और कांग्रेस में टक्कर होती थी। कभी कांग्रेस तो कभी इनेलो की सरकार बनती थी। पिछले एक दशक से हरियाणा में मुख्यमंत्री की सीट पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा काबिज हैं।
हुड्डा इस बार तीसरी बार हैट्रिक लगाने के लिए तैयार हैं। उनके धुर विरोधी बीरेंद्र सिंह भाजपा का दामन थाम चुके हैं, लेकिन उनकी मुख्यमंत्री बनने की लालसा खत्म नहीं हुई है। वहीं हजकां भाजपा गठबंधन में मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट होने वाले कुलदीप बिश्नोई को भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने से इनकार कर दिया है, लेकिन कुलदीप खुद को अभी भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने उनके साथ धोखा किया है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से कुछ नेताओं ने आलाकमान से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा का विरोध किया है, लेकिन आलाकमान ने हुडडा पर भरोसा जताते हुए हुड्डा पर भरोसा कर उनके नेतृत्व में तीसरी बार चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
हैट्रिक बनाने का दावा कर रहे हुड्डा
हरियाणा की राजनीति में लगातार दो बार सत्ता पर काबिज रहने वाले मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैट्रिक बनाने का दावा कर रहे हैं। हरियाणा नंबर वन और विकास का एजेंडा लेकर वे जनता के बीच जा रहे हैं। प्रति व्यक्ति आय के मामले में वे हरियाणा मॉडल से गुजरात मॉडल को पीछे मान रहे हैं।
बीरेंद्र सिंह का सपना अभी नहीं टूटा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धुर विरोधी रहे दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह भाजपा का दामन थाम चुके हैं। भाजपा से हाथ मिलाने के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री बनने का सपना नहीं छोड़ा है। उनका कहना है कि वे राजनीति में जब तक रहेंगे तब तक उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना जीवित रहेगा।
कुलदीप बिश्नोई भी ठोक रहे हैं ताल
हरियाणा जनहित कांग्रेस के प्रमुख कुलदीप बिश्नोई भजनलाल के समय से ही स्वयं को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करके चल रहे हैं। यह बात अलग है कि पिछले चुनाव में उनकी सीटें अधिक नहीं आईं। लेकिन इस बार भी भाजपा से कुलदीप का गठबंधन इसी शर्त पर हुआ था। हालांकि लोकसभा चुनाव में सीटें आने के बाद भाजपा पुराने समझौते पर कायम नहीं होना चाहती
प्रदेश की राजनीति में पुराना नाम है रामबिलास शर्मा
हरियाणा भाजपा के लिए प्रो.रामबिलास शर्मा पुराना नाम है। वर्तमान में शर्मा प्रदेश अध्यक्ष हैं और दो बार मंत्री रह चुके हैं। इन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश में लोकसभा चुनाव लड़ा गया।
अब विधानसभा चुनाव भी इन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। गैर जाट के तौर पर ब्राह्मण नेताओं में पहले दावेदार हैं, लेकिन भाजपा ने हरियाणा में जाट राजनीति को देखते हुए किसी जाट नेता को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में सोचा तो शर्मा का पत्ता कट सकता है।
कैप्टन अभिमन्यु बड़ा नाम
संघ से पुराना नाता है खट्टर का:
मनोहर लाल खट्टर भाजपा के लिए पुराना नाम है। प्रदेश के संगठन मंत्री हैं। अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है। भाजपा हाईकमान में अच्छी पैठ के अलावा संगठन को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। पंजाबी समाज की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं।
अहीरवाल के दिग्गज नेता:
भाजपा में राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल के दिग्गज नेता के तौर पर जाने जाते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए। सांसद बनकर केंद्र में राज्य मंत्री बने। मुख्यमंत्री हुड्डा पर आरोप लगाकर सुर्खियों में आए राव इंद्रजीत भी सीएम पद केदावेदार हैं। हालांकि वे भाजपा उनके लिए नया घर है। दूसरी तरफ राज्य के नेताओं से संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं।
चौटाला के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही इनेलो
बसपा ने अरविंद शर्मा पर जताया भरोसा:
बसपा ने करनाल से सांसद रहे अरविंद शर्मा को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। वहीं विनोद शर्मा और गोपाल कांडा अपनी अपनी पार्टियों से ताल ठोक रहे हैं।
भाजपा में इन नामों को भी नहीं कर सकते नजरअंदाज
बेबाक शैली के लिए जाने वाले भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज, रोहतक से लोकसभा चुनाव लड़ चुके मोदी के करीबी ओम प्रकाश धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष के साथी केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर जैसे नेताओं का भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता।